किस देश में सबसे आसान है इच्छामृत्यु का तरीका, भारत में कौन-सा मैथड अपनाया जाता है?

भारत में जिस तरीके को मंजूरी मिली है उसे पैसिव यूथेनेशिया (Passive Euthanasia) कहा जाता है.

इसमें मरीज को कोई जहरीला इंजेक्शन या दवा देकर सीधे तौर पर नहीं मारा जाता है. इसके बजाय, मरीज को जिंदा रखने वाले जो कृत्रिम साधन हैं- जैसे वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब या लाइफ सपोर्ट सिस्टम, उन्हें हटा लिया जाता है.

इच्छामृत्यु (Assisted Suicide)  के मामले में स्विट्जरलैंड को दुनिया का सबसे उदार देश माना जाता है.

यदि कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक अक्षमता या जीवन से अत्यधिक थकान (Tired of Life) के कारण मरना चाहता है, तो उसे अनुमति मिल सकती है.

यहां 'डिग्निटास' जैसी संस्थाएं विदेशियों को भी यह सुविधा प्रदान करती हैं, जिसे अक्सर 'सुसाइड टूरिज्म' भी कहा जाता है.

नीदरलैंड और बेल्जियम वे पहले देश थे, जिन्होंने 'एक्टिव यूथेनेशिया' को कानूनी बनाया. यहां डॉक्टर खुद मरीज को घातक दवा का इंजेक्शन दे सकते हैं.

यहां डॉक्टर खुद मरीज को घातक दवा का इंजेक्शन दे सकते हैं. हालांकि, यहां के नियम स्विट्जरलैंड से ज्यादा सख्त हैं.

यहां मरीज को 'असहनीय पीड़ा' में होना चाहिए और मेडिकल बोर्ड को यह यकीन दिलाना होता है कि सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है.