जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में ये दिलचस्प बातें, कौन बनाता है रथ
जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में ये दिलचस्प बातें, कौन बनाता है रथ
पुरी में दुनिया के सबसे विशाल और प्रसिद्ध उत्सवों में से एक जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत हो चुकी है
पुरी में दुनिया के सबसे विशाल और प्रसिद्ध उत्सवों में से एक जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत हो चुकी है
जगन्नाथ जी का रथभगवान जगन्नाथ जी के रथ का नाम नंदीघोष है और तीनों रथों में यह सबसे बड़ा होता है
जगन्नाथ जी का रथभगवान जगन्नाथ जी के रथ का नाम नंदीघोष है और तीनों रथों में यह सबसे बड़ा होता है
सुभद्रा का रथजगन्नाथ जी की बहन सुभद्रा देवदलन (पद्मरथ) पर सवार होती हैं, जिसे बनाने में 593 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है
सुभद्रा का रथजगन्नाथ जी की बहन सुभद्रा देवदलन (पद्मरथ) पर सवार होती हैं, जिसे बनाने में 593 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है
बलभद्र का रथतालध्वज रथ पर सवार होकर बलभद्र सबसे आगे चलते हैं। इस रथ को बनाने में 763 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है
बलभद्र का रथतालध्वज रथ पर सवार होकर बलभद्र सबसे आगे चलते हैं। इस रथ को बनाने में 763 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है
कौन बनाता है रथभगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में रथों के निर्माण में सबसे अहम भूमिका महाराणा कारीगर (बढ़ई सेवक) निभाते हैं
कौन बनाता है रथभगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में रथों के निर्माण में सबसे अहम भूमिका महाराणा कारीगर (बढ़ई सेवक) निभाते हैं
कितनी पुरानी है यह परंपरायह परंपरा लगभग 800 से 900 वर्ष पुरानी मानी जाती है
कितनी पुरानी है यह परंपरायह परंपरा लगभग 800 से 900 वर्ष पुरानी मानी जाती है
रथ और रस्सियों को खींचने का महत्व-रथ को संधिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है और रथ को केवल छू लेने से ही भक्तों को भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा प्राप्त होती है
रथ और रस्सियों को खींचने का महत्व-रथ को संधिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है और रथ को केवल छू लेने से ही भक्तों को भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा प्राप्त होती है
अणसर- भगवान का बीमार पड़नाभगवान जगन्नाथ 14-15 दिनों तक एकांतवास (अणसर या अणसर घर) में विश्राम करते हैं और इस दौरान भक्तों को उनके दर्शन नहीं होते
अणसर- भगवान का बीमार पड़नाभगवान जगन्नाथ 14-15 दिनों तक एकांतवास (अणसर या अणसर घर) में विश्राम करते हैं और इस दौरान भक्तों को उनके दर्शन नहीं होते