इस रेलवे स्टेशन का नहीं है कोई नाम, गांव वालों ने क्यों हटा दिया साइन बोर्ड
इस रेलवे स्टेशन का नहीं है कोई नाम, गांव वालों ने क्यों हटा दिया साइन बोर्ड
देशभर में हजारों रेलवे स्टेशन हैं और हर स्टेशन की अपनी एक अलग पहचान होती है, जो उसके नाम से जुड़ी होती है
देशभर में हजारों रेलवे स्टेशन हैं और हर स्टेशन की अपनी एक अलग पहचान होती है, जो उसके नाम से जुड़ी होती है
लेकिन क्या आप जानते है एक ऐसे रेलवे स्टेशन के बारे में, जहां ट्रेनें तो रोज रुकती हैं, लेकिन इसका कोई नाम ही नहीं है.
लेकिन क्या आप जानते है एक ऐसे रेलवे स्टेशन के बारे में, जहां ट्रेनें तो रोज रुकती हैं, लेकिन इसका कोई नाम ही नहीं है.
इस स्टेशन का निर्माण साल 2008 में बांकुरा-मैसग्राम रेलखंड पर किया गया था.
इस स्टेशन का निर्माण साल 2008 में बांकुरा-मैसग्राम रेलखंड पर किया गया था.
यह स्टेशन बर्धमान शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है और रैना साथ ही रैनागढ़ गांवों के बीच बनाया गया था.
यह स्टेशन बर्धमान शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है और रैना साथ ही रैनागढ़ गांवों के बीच बनाया गया था.
स्टेशन का नाम रैनागढ़ रखे जाने के बाद पास के रैना गांव के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया.
स्टेशन का नाम रैनागढ़ रखे जाने के बाद पास के रैना गांव के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया.
ग्रामीणों का कहना था कि जिस जमीन पर स्टेशन और प्लेटफॉर्म बने हैं, वह रैना गांव की है. इसलिए स्टेशन का नाम भी रैना होना चाहिए.
ग्रामीणों का कहना था कि जिस जमीन पर स्टेशन और प्लेटफॉर्म बने हैं, वह रैना गांव की है. इसलिए स्टेशन का नाम भी रैना होना चाहिए.
वहीं दूसरी ओर रैनागढ़ के लोग अपने नाम को बनाए रखने की मांग पर अड़े रहे. इसी बात को लेकर दोनों गांवों के बीच विवाद बढ़ता गया.
वहीं दूसरी ओर रैनागढ़ के लोग अपने नाम को बनाए रखने की मांग पर अड़े रहे. इसी बात को लेकर दोनों गांवों के बीच विवाद बढ़ता गया.
लगातार विवाद और विरोध के बाद रेलवे ने एक अलग फैसला लिया. अधिकारियों ने स्टेशन के पीले बोर्ड से रैनागढ़ नाम पूरी तरह हटा दिया.
लगातार विवाद और विरोध के बाद रेलवे ने एक अलग फैसला लिया. अधिकारियों ने स्टेशन के पीले बोर्ड से रैनागढ़ नाम पूरी तरह हटा दिया.
इसके बाद से स्टेशन का साइन बोर्ड खाली है. आज भी यहां ट्रेनें रुकती हैं, यात्री चढ़ते और उतरते हैं, लेकिन स्टेशन के बोर्ड पर कोई नाम दिखाई नहीं देता है.
इसके बाद से स्टेशन का साइन बोर्ड खाली है. आज भी यहां ट्रेनें रुकती हैं, यात्री चढ़ते और उतरते हैं, लेकिन स्टेशन के बोर्ड पर कोई नाम दिखाई नहीं देता है.
नीता अंबानी ने जामनगर से Karishma Tanna के लिए भेजे केसरी आम…