दिल्ली के कनॉट प्लेस का क्या है इतिहास, अंग्रेजों के जमाने में कैसी थी यह जगह?

दिल्ली के कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी के लहरा दो तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया गया.

इसका निर्माण 1929 में शुरू हुआ और 1933 में पूरा हुआ.

यह परियोजना 1911 में किंग जॉर्ज पंचम की उसे घोषणा के बाद शुरू हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत की राजधानी कलकत्ता से बदलकर दिल्ली कर दी जाएगी.

इस इलाके के विकास से पहले यहां माधवगंज, जयसिंह पुरा और राजा का बाजार जैसे गांव हुआ करते थे.

यहां बबूल के घने जंगल और झाड़ियां थीं जहां हिरण और जंगली सूअर रहते थे.

इस बाजार को ब्रिटिश मुख्य वास्तुकार रॉबर्ट टोर रसेल ने डिजाइन किया था. इसी के साथ इसके निर्माण की जिम्मेदारी एक ठेकेदार सरदार शोभा सिंह को सौंपी गई थी.

इस बाजार का नाम ड्यूक ऑफ कनॉट प्रिंस आर्थर के नाम पर रखा गया. यह महारानी विक्टोरिया के तीसरे बेटे थे और 1921 में भारत आए थे.