पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? जान लें नियम

पितृ पक्ष में कुछ कार्यों को करना अत्यंत शुभ माना जाता है और कुछ कार्यों की मनाही होती है

पितृ पक्ष में किन कामों से प्रसन्न होते हैं पितृ गण और किन कार्यों को करने से हो सकते हैं नाराज जानिये...

पितृ पक्ष में क्या करें जानिये...

नियमित तर्पण और जल अर्पित- प्रतिदिन कुशा और काले तिल मिले जल से पितरों का तर्पण करना चाहिए श्राद्ध और पिंडदान- पितृ पक्ष में पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार दोपहर के समय (कुतप या अपराह्न काल में) विधि-विधान से श्राद्ध और पिंडदान करना चाहिए

पंचबलि भोग: पितृ पक्ष में भोजन तैयार होने पर सबसे पहले पांच हिस्सों में भोग निकालना चाहिए. ब्राह्मण भोजन और दान: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में किसी ब्राह्मण को सम्मानपूर्वक घर बुलाकर सात्विक भोजन कराना चाहिए

सात्विकता और संयम का पालन: पितृ पक्ष के पूरे 16 दिन मन, कर्म और वचन से पवित्रता बनाए रखना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए

पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए- मांगलिक कार्यों की शुरुआत: पितृ पक्ष में विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, नए वाहन या वस्त्रों की खरीदारी जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं

तामसिक भोजन का सेवन: मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल, लौकी, सरसों का साग और बैंगन का सेवन पूरी तरह से त्याग करना चाहिए. बाल, दाढ़ी और नाखून काटना: श्राद्ध पक्ष के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून काटने की मनाही होती है

कलह और क्रोध: पितृ पक्ष के समय घर में किसी प्रकार का वाद-विवाद नहीं करना चाहिए.  बुजुर्गों और जीवित माता-पिता का अपमान नहीं करना चाहिए, मान्यता है कि इससे पितर अप्रसन्न होते हैं