आखिर दरबार में बैठकर टोपी क्यों बुनता था औरंगजेब, कितने रुपये में बिकती थीं

अगर आपने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म छावा देखी होगी, तो इसमें औरंगजेब को दरबार में बैठे वक्त हाथ से कुछ बुनते हुए देखा जा सकता है।

औरंगजेब वाकई अपने दरबार में बैठकर टोपी बुना करता था

लेकिन वह ऐसा करता क्यों था, इसकी वजह भी आपको बताते हैं.

औरंगजेब ने अपना कुछ समय नमाज की टोपियां (तकियाह) बुनने और हाथ से कुरान लिखने में बिताया

औरंगजेब अपने निजी खर्च के लिए शाही खजाने के इस्तेमाल के सख्त खिलाफ था

इसलिए वह अपनी बुनी हुई टोपियों को बेचता था और इससे मिलने वाले धन का इस्तेमाल निजी खर्च के लिए करता था

इन टोपियों की कीमत उस जमाने के हिसाब से 14 रुपये 12 आना थी.

इस हिसाब से उसकी एक टोपी की कीमत 14 चांदी के सिक्के और 12 आना थी

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