रथ यात्रा से पहले 15 दिन के लिए क्यों बंद होता है जगन्नाथ मंदिर?

रथ यात्रा से 15 दिन पहले पूर्णिमा तिथि के दिन मंदिर के सेवक एक खास पवित्र कुएं से 108 घड़ों में पवित्र जल लाते हैं

इस प्रक्रिया के दौरान, सेवक अपने मुंह को कपड़े से ढक लेते हैं जिससे उनकी सांस से पानी दूषित न हो जाए

उसके बाद इस पवित्र जल में हल्दी, चंदन, फूल, इत्र और अन्य चीजें मिलाई जाती हैं

वैदिक मंत्रों, शंख की ध्वनि और कीर्तन के बीच भगवान जगन्नाथ को स्नान कराया जाता है

इस परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ को 35 घड़ों से जल चढ़ाया जाता है

बलभद्र को 33, माता सुभद्रा को 22 और सुदर्शन को 18 घड़ों से स्नान कराया जाता है

इस भव्य स्नान के बाद जगन्नाथ भगवान को बुखार आ जाता है और भगवान 15 दिनों के लिए बाहर नहीं निकलते हैं

यही नहीं इसी वजह से जगन्नाथ मंदिर के कपाट बंद करने पड़ते हैं और दर्शन पर पाबंदी लगा दी जाती है

15 दिनों की इस अवधि को 'अनसर' कहा जाता है

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