काशी में मृत्यु को मोक्ष का द्वार क्यों माना जाता है? जानिए इसका रहस्य

काशी में शिव से जुड़ा एक मंत्र जो व्यक्ति को मौत के बाद जन्म-मृत्यु केे चक्र मुक्ति दिलाने में सहायक है.

इस मंत्र को स्वयं भगवान शिव दिवंगत के कानों में बोलते हैं.

बनारस शहर की रचना स्वयं भगवान शिव ने की थी और यह उनके त्रिशूल पर स्थित है.

काशी में मौत को भय नहीं माना जाता. जब कभी भी यहां किसी हिंदू की मृत्यु होती है

तो उन्हें अंतिम संस्कार के लिए काशी के मणिकर्णिका घाट ले जाया जाता है.

तब माना जाता है कि, खुद भगवान शिव दिवंगत आत्मा के कानों में तारक मंत्र का उच्चारण करते हैं और जिसके बाद आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

ये तारक मंत्र है राम नाम, जो दो मंत्रों अष्टाक्षर 'ऊँ नमो नारायणाय' और पंचाक्षर 'नमः शिवाय' से मिलकर बना है.

पौराणिक परंपराओं के मुताबिक, भगवान शिव ने सबसे पहले देवी पार्वती को तारक मंत्र के बारे में बताया था.

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