टाइटैनिक को क्यों कहा जाता था कि कभी नहीं डूबेगा, क्या लगा था इसमें...
टाइटैनिक को क्यों कहा जाता था कि कभी नहीं डूबेगा, क्या लगा था इसमें...
साल 1912 में बना टाइटैनिक जहाज अपने समय का सबसे बड़ा, सबसे शानदार और सबसे सुरक्षित माना जाता था.
साल 1912 में बना टाइटैनिक जहाज अपने समय का सबसे बड़ा, सबसे शानदार और सबसे सुरक्षित माना जाता था.
कहा जाता था कि यह जहाज कभी डूब ही नहीं सकता है. इसमें आधुनिक तकनीक, मजबूत स्टील और खास वाटरटाइट कमरे बनाए गए थे
कहा जाता था कि यह जहाज कभी डूब ही नहीं सकता है. इसमें आधुनिक तकनीक, मजबूत स्टील और खास वाटरटाइट कमरे बनाए गए थे
अपनी पहली ही यात्रा में यह विशाल जहाज अटलांटिक महासागर में डूब गया और इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री हादसा बन गया.
अपनी पहली ही यात्रा में यह विशाल जहाज अटलांटिक महासागर में डूब गया और इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री हादसा बन गया.
इसकी लंबाई लगभग 269 मीटर थी, चौड़ाई 28 मीटर और ऊंचाई करीब 53 मीटर, इसमें 3 बड़े इंजन लगे थे.
इसकी लंबाई लगभग 269 मीटर थी, चौड़ाई 28 मीटर और ऊंचाई करीब 53 मीटर, इसमें 3 बड़े इंजन लगे थे.
रोजाना लगभग 600 टन कोयला जलता था. इस जहाज में करीब 3300 लोगों के रहने की जगह थी.
रोजाना लगभग 600 टन कोयला जलता था. इस जहाज में करीब 3300 लोगों के रहने की जगह थी.
टाइटैनिक को उस समय की सबसे आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना माना गया था. इसमें कई वाटरटाइट कंपार्टमेंट (पानी रोकने वाले कमरे) बनाए गए थे.
टाइटैनिक को उस समय की सबसे आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना माना गया था. इसमें कई वाटरटाइट कंपार्टमेंट (पानी रोकने वाले कमरे) बनाए गए थे.
अगर एक या दो कमरे में पानी भर भी जाए तो जहाज के बाकी हिस्से सुरक्षित रहें.
अगर एक या दो कमरे में पानी भर भी जाए तो जहाज के बाकी हिस्से सुरक्षित रहें.
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