बॉम्बे हाई कोर्ट ने दक्षिण मुंबई में नौसेना के प्रमुख एयर स्टेशन INS शिक्रा के पास एक ऊंची इमारत के निर्माण को लेकर भारतीय नौसेना को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने इसे नौसेना की ‘इंटेलिजेंस और सुरक्षा की बड़ी चूक’ करार दिया है. अदालत ने इस मामले में सख्त टिप्पणी की है. जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की पीठ ने हैरानी जताते हुए कहा कि नौसेना के अधिकारी अपने दफ्तरों में बैठे रहे और उनकी नाक के नीचे एक गगनचुंबी इमारत खड़ी हो गई. कोर्ट ने कहा, “हमें आश्चर्य है कि नौसेना इतने साल से बन रही इतनी ऊंची इमारत को देखने में कैसे विफल रही? यह केवल नौसेना अधिकारियों की ओर से इंटेलिजेंस की विफलता मानी जा सकती है.”
कोर्ट ने INS शिक्रा के पास ऊंची इमारत निर्माण पर नौसेना को फटकार लगाई, इसे सुरक्षा चूक बताया. कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि 2011 से बन रही इमारत पर नौसेना ने 2024 तक ध्यान क्यों नहीं दिया?
INS शिक्रा के कमांडिंग ऑफिसर ने एक याचिका दायर कर इस निर्माण परियोजना को रोकने की मांग की थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान के लिए बड़ा सुरक्षा जोखिम है. हालांकि, कोर्ट ने नोट किया कि इस इमारत का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था और 2024 तक इसकी 19 मंजिलें (लगभग 70 मीटर) बन चुकी थीं, तब जाकर नौसेना की नींद टूटी.
कोर्ट ने पूछा कि नौसेना केवल इसी एक इमारत का विरोध क्यों कर रही है, जबकि INS शिक्रा के पास कई अन्य रिहायशी ऊंची इमारतें पहले से मौजूद हैं. जब 2011 से निर्माण चल रहा था, तो नौसेना ने इतने सालों तक कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई?
नौसेना के वकील ने तर्क दिया कि अन्य इमारतें 2011 से पहले की हैं. 2011 में रक्षा मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत रक्षा प्रतिष्ठानों के पास ऊंची इमारतों के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) अनिवार्य कर दिया गया था.
अदालत ने निर्माण पर लगी अंतरिम रोक को बढ़ाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डेवलपर निर्धारित ऊंचाई (53.07 मीटर) से ऊपर का निर्माण अपने जोखिम पर करेगा. यदि भविष्य में कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचता है कि NOC अनिवार्य थी, तो 53 मीटर से ऊपर की पूरी इमारत को गिराने का आदेश दिया जा सकता है. इस मामले की अंतिम सुनवाई 30 मार्च को तय की गई है.
डेवलपर की ओर से वरिष्ठ वकील जनक द्वारकादास ने दलील दी कि इमारत को ‘कमेंसमेंट सर्टिफिकेट’ मार्च 2011 में मिला था, जो रक्षा मंत्रालय की अधिसूचना से महीनों पहले का है. इसलिए उन्हें किसी रक्षा NOC की जरूरत नहीं थी.
इससे पहले, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुंबई दौरे को देखते हुए हाईकोर्ट ने सुरक्षा संबंधी तत्काल चिंताओं के आधार पर निर्माण कार्य पर अस्थायी रोक लगा दी थी. हालांकि, बुधवार की सुनवाई में अदालत का रुख प्रशासन की ढिलाई पर अधिक केंद्रित रहा.
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