रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हार्टिकल्चर कांग्रेस में बोलते हुए ये देखकर नाखुश हो गए कि हार्टिकल्चर विभाग तिखुर की व्यावसायिक खेती की तरफ बढ़ रहा है. उन्होने कहा – ”मैं इससे बिल्कुल भी खुश नहीं हूं.” भूपेश बघेल ने मंच से जब ये कहा तो वहां चारों तरफ सन्नाटा पसर गया.

इसके बाद भूपेश बघेल ने बताया कि उनकी नाखुशी की वजह क्या है. मुख्यमंत्री भूपेश ने कहा कि नगरी सिहावा से लेकर कोंडागांव के जंगल में हज़ारों एकड़ में तिखुर लगे हुए हैं. लेकिन उसे खोदने की, ट्रांसपोर्ट की और मार्कटिंग की व्यवस्था क्यों नहीं की गई. जिससे जंगल में रहने वालों को लाभ होता. उन्होंने कहा कि जो चीज़ हमारे जंगलों में उत्पादित होता है. उसके लिए गैर जरुरी तरीके से खेतों को इंगेज किया जा रहा है. भूपेश बघेल ने कहा कि जंगल में मिलने वाला तिखुर पूर्ण रुप से जैविक है. इसकी ब्रांडिग का प्रयास किया जाना चाहिए. उन्होंने हल्दी के व्यावसायिक उत्पादन को बढ़ावा देने पर सवाल उठाए कि इसके लिए मार्केट कैसे होगा.

भूपेश बघेल ने इस मौके पर प्रदेश के जंगलों ेमें फलों और सब्जियों की खेती का प्रस्ताव रखा. भूपेश बघेल ने कहा कि जंगल प्रदेश में 44 प्रतिशत है लेकिन वहां न रहने वालों को कुछ खाने के लिए मिल रहा है. न ही जानवरों को. उन्होंने कहा कि इस जंगल में फल और सब्जियां लगाई जानी चाहिए. जिससे बड़ा ऑर्गेनिक उत्पादन शुरु हो सके. उन्होंने कहा कि इसकी मार्किटिंग कर दी गई तो जंगल में रहने वालों का फायदा होगा.

उन्होंने कहा कि एक फसल का उत्पादन सीमित रकबे में करने की दिशा में काम करना होगा. जिससे किसानों को अपनी फसल का वाजिब मूल्य मिल सके. उन्होंने कहा कि जो किसान एक साल लखपति-और करोड़पति होता है. अगले ही साल वो खाकपति हो जाता है. उन्होंने सोयाबीन का हवाला दिया. जिसका प्रचार-प्रसार तीस-चालीस साल पहले किया गया था. लेकिन जब किसानों ने बंपर पैदावार की तो कोई खरीदने वाला नहीं मिला.

इस कांग्रेस में देश के समर्थन मूल्य तय करने वाली कमेटी के अध्यक्ष विजय पाल शर्मा भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनसे राई, कोदो, कुटकी का समर्थन मूल्य तय करने की मांग की. इसके अलावा कृषि केंद्र जबलपुर से रायपुर जल्द करने का भी अनुरोध किया.

जलवायु परिवर्तन पर बोले भूपेश

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा  कि जलवायु परिवर्तन से छत्तीसगढ़ अछूता नहीं  है. इसके चलते प्रदेश में बारिश कम हो रही है. फलों और सब्जियों के उत्पादन पर होने वाले असर पर उन्होंने अध्ययन करने पर जोर दिया. उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि जमीन का पानी लगातार खारा होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन बढ़ाकर इसका मूल्य काफी कम करना होगा. जिससे किसान इसका फायदा उठा सके. भूपेश बघेल ने मनरेगा को खेती से जोड़ने पर ज़ोर दिया.