What is Daruma Doll: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के जापान दौरे पर हैं। यहां वे 15वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान राजधानी टोक्यों में शोरिनजान मंदिर के मुख्य पुजारी रेव सेशी हिरोसे ने शुक्रवार को पीएम मोदी को दारुमा डॉल भेट की। इसे जापानी पारंपरिक गुड़िया माना जाता है जो कि सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो में जापान के पूर्व प्रधानमंत्रियों योशीहिदे सुगा और फुमियो किशिदा से मुलाकात की। पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री योशीहिदे के साथ भारत-जापान सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। जापान में दारुमा जी मंदिर के मुख्य पुजारी रेवरेंड सेशी हिरोसे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक दारुमा डॉल भेंट की. दारुम जापान का एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक प्रतीक और स्मृति चिह्न माना है.
क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जापान के पूर्व प्रधानमंत्री और जापान-भारत संघ के अध्यक्ष श्री योशीहिदे सुगा के साथ मेरी बैठक बहुत अच्छी रही। हमने भारत-जापान सहयोग के विभिन्न आयामों और इसे और कैसे गहरा किया जा सकता है, इस पर चर्चा की। हमारी चर्चा में इस बात पर चर्चा हुई कि प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग कैसे बनाया जाए।
दारुमा डॉल क्या है?
दारुमा गुड़िया एक खोखली, गोल, जापानी पारंपरिक गुड़िया है जिसे बौद्ध धर्म की ज़ेन परंपरा के संस्थापक बोधिधर्म के आधार पर बनाया गया है। ये गुड़ियाएं आमतौर पर लाल रंग की होती हैं और भारतीय भिक्षु बोधिधर्म को दर्शाती हैं, लेकिन क्षेत्र और कलाकार के आधार पर इनके रंग और डिजाइन में काफी भिन्नता होती है।
क्या है दारूमा डॉल का महत्व?
मान्यता है कि ये गुडियां सौभाग्य लाती हैं और जापानी कहावत “सात बार गिरो, आठ बार उठो” को साकार करती हैं। परंपरागत रूप से, जापानी लोग कोई व्यक्तिगत लक्ष्य निर्धारित करने से पहले उसकी प्राप्ति के इरादे से गुड़िया की एक आंख को रंगते हैं। दूसरी आंख तब तक खाली रहती है, जब तक लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता। यह आपको अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर कार्य करने की याद दिलाती है।
बौद्ध धर्म का दारुमा डॉल
इसे जापान के जेन बौद्ध धर्म के संस्थापक बोधिधर्म का प्रतीकात्मक रूप माना जाता है. दारुमा डॉल जापानी संस्कृति का अभिन्न अंग है और इसे काफी पवित्र और सौभाग्य वाला माना जाता है. यही वजह है कि यह वहां के अधिकतर घर व दुकानों में पाया जाता है. दारुम डॉल को दृढ़ता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. इसके बारे में मान्यता है कि यह किसी लक्ष्य को तय करने और उसे प्राप्त करने के लिए उपयोगी और महत्वपूर्ण है.
दारुमा का भारत से है गहरा संबंध
दारुमा गुड़िया का भारत से एक विशेष नाता है. दारुमा गुड़िया प्रतीकात्म रूप में उस बौद्ध भिक्षु से जुड़ा है, जिसने जापान में जेन बौद्धधर्म की स्थापना की. दरअसल, भारत के तमिलनाडु स्थित कांचीपुरम के एक भारतीय बोधिधर्म नाम के बौद्ध भिक्षु थे.
बोधिधर्म भगवान बुद्ध का प्रचार करने चीन गए. वहां उन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की. इसी को जापान में जेन बौद्ध धर्म के रूप में जाना जाता है और उन्हें जापान में दारुमा दाइशी के नाम से जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि बोधिधर्म ने दीवार की ओर मुंह करके, अपने हाथ-पैर मोड़कर, लगातार नौ वर्षों तक ध्यान किया था. यही वजह है कि दारुमा गुड़िया का आकार भी गोल है, जो उनके मुड़े हुए हाथ और पैर को दर्शाता है.
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