I-PAC:  केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच कोयला चोरी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक (I-PAC) के ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी ने कोलकाता में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन (prateek jain) के आवास और कार्यालय में छापा मारा। हालांकि कार्रवाई के दौरान उस समय बवाल मच गया, जब खुद सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं। इसके बाद जमकर कोलकाता में राजनीति ड्रामा देखने को मिला।

कोलकाता में ड्राम के बाद आई-पैक एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। तो चलिए यहां जानते हैं कि क्या है आई-पैक और कौन हैं प्रतीक जैन? जिनके घर ED की रेड पड़ते ही सीएम ममता बनर्जी सीधे पहुंच गईं और जांच एजेंसी से भिड़ गईं। आखिर दोनों के बीच संंबंध क्या है?

दरअसल I-PAC ममता की पार्टी TMC के लिए काम करती है। I-PAC ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के साथ पिछले 10 साल से जुड़ी हुई है। आई-पैक टीएमसी पार्टी के लिए राजनीतिक स्ट्रेटजी बनाती है। अगवे वर्ष पस्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी का नतीजा है कि प्रतीक जैन के घर और ऑफिस में छापा पड़ने की भनक मिलते ही सीएम ममता बनर्जी सीधे पहुंच गई।

पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है I-PAC
बता दे कि I-PAC बड़ी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है। इसकी शुरुआत प्रशांत किशोर ने की थी, जिन्हें पीके के नाम से जाना-पहचाना जाता है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने इस कंपनी को स्टैब्लिश किया था। प्रशांत किशोर ने 2013 में उन्होंने सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गर्वनेंस नाम से एक कंपनी शुरू की थी, जो आई-पैक (I-PAC) यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (Indian Political Action Committee) के रूप में बदल गया। इस कंपनी में उनके साथ प्रतीक जैन, ऋषिराज सिंह और विनेश चंदेल कंपनी के को-फाउंडर्स हैं। पीके के बाद ये तीनों पढ़े-लिखे युवा आई-पैक के मुख्य स्तंभ हैं।

कौन हैं IPAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन?

प्रतीक जैन की बात करें तो वो बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। प्रतीक आई-पैक से जुड़ने से पहले डेलोएट इंडिया (Deloitte India) कंपनी में एनालिस्ट भी रह चुके हैं। ट्विटर पर सक्रिय रहने वाले प्रतीक आमतौर पर लोप्रोफाइल रहते हैं।

PAC के चीफ प्रतीक जैन को राज्य की राजनीति और प्रशासन में बड़ी पकड़ मानी जाती है। वह कई बार नबन्ना (राज्य सचिवालय) जा चुके हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिल चुके हैं। I-PAC विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग सरकारी प्रोजेक्ट्स को लागू करने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार के बीच पुल का काम करता है। एक तरफ, जैसे IPAC नियमित रूप से एडमिनिस्ट्रेशन के टॉप अधिकारियों से बातचीत करता है, वैसे ही I-PAC टीम भी रूलिंग पार्टी के टॉप लीडर्स में से एक अभिषेक बनर्जी और उनके ऑफिस के साथ करीबी रिश्तों और बातचीत के आधार पर काम करती है। I-PAC की टीम विभिन्न विधानसभा केंद्रों में समीक्षा भी कर रही है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल के कैंडिडेट कौन होंगे या किसे बाहर रखा जाएगा, यह तय करने में IPAC का रोल काफी अहम होता है।

छापे के दौरान ममता बनर्जी का पहुंचना क्यों अहम?

जांच के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुद उस स्थान पर पहुंचना, जहां ईडी की टीम काम कर रही थी, अपने आप में असाधारण माना जा रहा है। आमतौर पर किसी जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान किसी मुख्यमंत्री की मौजूदगी कम ही देखने को मिलती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम केंद्र की एजेंसियों को सीधा राजनीतिक संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाईयों को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच तीखी बयानबाज़ी होती रही है।

कार्रवाई क्यों हो रही है?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पड़ताल कर रही है। आरोप है कि घोटाले का धन (I-PAC) तक भी पहुंचा है। ईडी के अनुसार, अनूप माझी और उनके साथियों ने कोयला चोरी से मिले काले धन को गोवा भेजा. यह पैसा 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रचार के लिए I-PAC को दिया गया। 2022 के गोवा चुनाव में I-PAC ने ही टीएमसी के लिए चुनावी कैंपेन किया था। अनूप माझी की ओर से यह भुगतान टीएमसी के चुनावी काम के लिए किया गया था। ईडी की टीम ने I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए।

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