रमजान का पवित्र महीना मुस्लिम समुदाय के लिए इबादत का महीना होता है. इस दौरान रोजा, नमाज और कुरान पढ़ने के साथ-साथ जकात और फितरा अदा करने का भी खास महत्व होता है. हर मुसलमान को ईद की नमाज से पहले जकात और फितरा अदा करना जरूरी होता है. यह एक तरह का दान है, जिससे जरूरतमंदों की मदद होती है.

जकात, इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक
इस्लाम में जकात को फर्ज और फितरा को जरूरी माना जाता है. जकात इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक है. जकात साल में कभी भी अदा की जा सकती है, लेकिन इसे ईद से पहले रमजान में अदा करना बेहतर माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि रमजान में अच्छे कामों का 70 गुना ज़्यादा फल मिलता है. मुसलमानों के लिए जकात अदा करना फर्ज है. जकात और फितरा का इस्तेमाल गरीबों की मदद करने के लिए किया जाता है ताकि वे भी ईद मना सकें. यह पक्का करना जरूरी माना जाता है कि आस-पड़ोस में कोई भूखा न रहे.
जकात
जकात फर्ज है और इसे जरूरी माना जाता है. एक व्यक्ति की सालाना बचत का ढाई प्रतिशत गरीबों, विधवाओं, अनाथों या जरूरतमंदों को दिया जाता है.
फितरा
फितरा ईद की नमाज से पहले दिया जाता है. इसकी कोई तय समय नहीं है; लोग अपनी क्षमता के अनुसार दान करते हैं.
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