आज 15 फरवरी है. यह दिन देश के एक ऐसे शख्स का जन्मदिन है जिसे आज दुनिया एक कुशल राजनीतिज्ञ और केंद्रीय मंत्री के रूप में जानती है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उन्होंने देश के लिए अपनी जान हथेली पर रख दी थी. जी हां, आपने बिल्कुल सही समझा हम बात कर रहे हैं हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) की. 1952 में दिल्ली के दरियागंज में जन्मे पुरी का जीवन किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं रहा है. 1980 के दशक में उन्होंने जो किया, वह मौत के मुंह में हाथ डालने जैसा था. उनका मिशन था – दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन LTTE के प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण (Velupillai Prabhakaran) से मिलना.

यह वाक्या उस वक्त का है जब श्रीलंका में गृह युद्ध चरम पर था. भारत और श्रीलंका के बीच 1987 का ऐतिहासिक शांति समझौता (Peace Accord) होना था, लेकिन इसके लिए प्रभाकरण की सहमति जरूरी थी. प्रभाकरण उस समय का सबसे खूंखार चेहरा था, जिस पर एक राष्ट्राध्यक्ष और पूर्व पीएम की हत्या की साजिश के आरोप थे.

प्रभाकरण से मिलना मतलब मौत को दावत देना था. भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी हरदीप सिंह पुरी ने यह जिम्मा उठाया. नेवल अफसर बीके गुप्ता के साथ वे जाफना के उन जंगलों में घुस गए जो बारूदी सुरंगों (Landmines) से पटे पड़े थे.

प्रभाकरण के ठिकाने तक पहुंचना आसान नहीं था. जब मुलाकात हुई और पुरी ने प्रभाकरण को दिल्ली आने का न्योता दिया, तो एलटीटीई के एक सदस्य ने कहा, “आप हमारे ‘राष्ट्रीय खजाने’ (प्रभाकरण) को ले जा रहे हैं.” इस पर हरदीप सिंह पुरी ने अपनी जुबान दी, “मैं वादा करता हूं, बातचीत का नतीजा चाहे जो हो, मैं उसे इसी जगह सही सलामत वापस छोड़ूंगा.” उनकी इसी हिम्मत और कूटनीति के कारण जुलाई 1987 में भारत-श्रीलंका समझौता हो पाया.

हरदीप सिंह पुरी ने बहुत कम उम्र में तय कर लिया था कि उन्हें देश की सेवा करनी है. हिंदू कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे एबीवीपी (ABVP) से जुड़े और छात्र राजनीति में सक्रिय रहे. उन्होंने कानून की पढ़ाई इसलिए की ताकि राजनीति को गहराई से समझ सकें.

हरदीप पुरी 2014 में भाजपा में शामिल हुए और सितंबर 2017 में उन्हें आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया.

मई 2019 में उन्हें नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. 2020 में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए और जुलाई 2021 में उन्हें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस एवं आवास एवं शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया. आज वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) की कमान उनके हाथ में है.

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