BJP PC : जब राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर, तो फिर किसानों को धान खरीदी में अंतर की राशि किस्तों में क्यों दे रही सरकार- धरमलाल कौशिक

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आरबीआई की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने कहा था कि कोरोना संकट के बीच भी राज्य की आर्थिक स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है, किसानों को अब तक नहीं पता अंतर की राशि कब और कितनी किस्तों में मिलेगी. सरकार की विश्वसनीयता नहीं रह गई

रायपुर- धान खरीदी में किसानों को अंतर की राशि देने शुरू की गई राजीव गांधी किसान न्याय योजना को बीजेपी ने अन्याय योजना करार दिया है. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि सरकार अंतर की राशि भी किस्तों में देने की बात कर रही है. सरकार की विश्वसनीयता नहीं रह गई है. किसानों को यह नहीं पता कि आखिर उन्हें कितनी किश्त में यह राशि दी जाएगी? सरकार ने जो वादा किसानों से किया था, उस वादे को पूरी करने वह किसानों की उम्मीद पर बिल्कुल खरी नहीं उतरी. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कोरोना संकट की वजह से यदि सरकार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह किसानों को अंतर की राशि दे सके, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक तरफ राज्य सरकार आरबीआई की रिपोर्ट के आधार पर कहती है कि आर्थिक स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है, तो फिर किसानों को किस्तों में राशि दिए जाने में दिक्कत कहां है?

लाॅकडाउन के बीच पत्रकारों से गूगल मीटिंग पर बातचीत करते हुए धरमलाल कौशिक ने कहा कि, राज्य सरकार किसानों की न्याय की बात करती दिखती है, लेकिन किसानों के साथ अन्याय हो रहा है. उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में खरीफ फसल के लिए 19 लाख 55 हजार किसानों का पंजीयन हुआ था.  25 लाख 28 हजार हेक्येटर यानी करीब 59 लाख 20 हजार एकड़. इनमें से 9 करोड़ 48 लाख क्विंटल धान खरीदी होनी थी, लेकिन सरकार ने 8 करोड़ 30 लाख क्विटंल धान खरीदी की. करीब 1 करोड़ क्विंटल धान नहीं खरीदा गया. लगभग 3 हजार करोड़ रूपए किसानों के खाते में जाना था, पर सरकार की अव्यवस्था की वजह से किसान इससे वंचित हो गए. कौशिक ने कहा कि राज्य बनने के बाद पहली बार रकबा में कटौती हुई. छत्तीसगढ़ के किसान 15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से पैदावार लेते हैं. सरकार ने 1 करोड़ 18 लाख क्विंटल धान कम खरीदा. अन्नदाता के साथ अन्याय किया. जिन किसानों के धान सोसाइटियों में पहुंच गए हैं, उनका धान भी नहीं लिया गया है. मुख्यमंत्री ने आश्वस्थ किया था. लेकिन प्रदेेश में लाखों किसान टोकन लेकर घूम रहे हैं. धान सोसाइटियों में पड़ा हुआ है. खरीदी नहीं की गई है. धरमलाल कौशिक ने कहा कि इसे लेकर मैंने खुद सहकारिता मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम और खाद्य मंत्री अमरजीत भगत से बात की, बावजूद इसके कोई राहत नहीं मिली. सोसाइटियों में पड़ा धान बारिश की वजह से खराब हो रहा है. सरकार की ओर से सूचना नहीं दी गई है कि किसानों के धान को कब खरीदा जाएगा. यह किसानों की क्षति है, साथ ही राष्ट्रीय क्षति भी है.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि बोनस देंगे, लेकिन हम लगातार बजट को देख रहे हैं. अब भी जब चार किस्तों की बात आ रही है, उसमें बोनस की बात नहीं है. हम उम्मीद कर रहे थे कि कोरोना वैश्विक संकट के समय किसानों को पैसे की जरूरत है. यदि बोनस की राशि दी जाती, तो किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आता. 1815 रूपए औऱ 1835 रूपए धान खरीदी की गई है. मोटा और पतला. इस आधार से अंतर की राशि 685 रूपए हैं, जो सरकार को देनी है. रविंद्र चौबे ने कहा था कि अप्रैल में दे देंगे. बाद में कहा दो किस्तों में देंगे. अब मई का महीना आ गया. धान खरीदी एक दिसंबर को शुरू हुई थी. छह महीने बीत गए हैं, अब तक भुगतान नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि किस्तों में देने की बात कर रहे हैं, तो कितने किस्तों में देंगे. यह स्पष्ट कर दिया जाए. जो कमिटमेंट किसानों से किया गया था, उस पर सरकार खरी नहीं उतरी. सदन के अंदर भी किया गया वादा सरकार ने पूरा नहीं किया. 685 रूपए को चार किस्तों में बांट दें, तो एक किसान को 187 रूपए मिलेगा. इसमें किसान का क्या होगा. किसान उस राशि का उचित उपयोग न कर सके, इसलिए सरकार ने यह किया है. क्या सरकार कमिटमेंट करेगी कि जिन किसानों ने बैंकों से कर्जा लिया गया है, उस राशि का भुगतान वह करेगी. किसान ब्याज की राशि भी पटा पाने में समर्थ नहीं है. किसान सरकारकी ओर देख रहे हैं कि राशि मिलेगी, तो बैंक का कर्जा पटाया जा सकेगा.

धरमलाल कौशिक ने कहा- राज्य में मक्के का सपोर्ट प्राइज 1760 रूपए हैं. सरकार ने कहा था कि सपोर्ट प्राइज में खरीदेंगे. कोंडागाव,कांकेर में 1760 रूपए में मक्का नहीं खरीदा जा रहा. 1100-1200 रूपए में बेचने पर किसान मजबूर हो रहे हैं. 14 हजार एकड़ में किसानों ने मक्का लगाया है. इस बार भी कैबिनेट में यह फैसला लिया गया कि मक्का, गन्ना लगाने वालों को अतिरिक्त राशि सरकार देगी. लेकिन मौजूदा हालात में सपोर्ट प्राइज में मक्का तक नहीं खरीद पा रही है. लगता है कि किसानों से मक्का नहीं खरीदने का सरकार ने ठान लिया है. इसलिए ही किसान मजबूर होकर कोचियों,व्यापारियों को बेचने पर मजबूर हुए हैं.  कौशिक ने कहा कि साल 2019-20 में गन्ना की खरीदी 355 रूपए में करना था, लेकिन खरीदी 261 रूपए में की गई. भोरमदेव में 12 हजार 77 किसानों के 57 करोड़ रूपए का भुगतान अब तक नहीं हुआ है. बीजेपी सरकार के दौरान 50 रूपए प्रति क्विंटल बोनस की राशि भी दी जाती थी. पंडरिया में किसानों को बोनस की 15 करोड़ की राशि नहीं दी जा सकी है.  पिछली बार जब हमने धरना आंदोलन का ऐलान किया था, तब सरकार ने आनन-फानन में बोनस दिया था. हम चाहते हैं कि किसानों के हक की राशि का भुगतान तत्काल होना चाहिए.  अंबिकापुर में गन्ना किसानों से गन्ना लेना सरकार ने बंद कर दिया है. किसान परेशान है. उन्हें आर्थिक क्षति हो रही है. उन्होने कहा कि तेंदूपत्ता का भी यही हाल है. बीजापुर में तेलंगाना के ठेकेदार आकर घुस गए हैं. जब तेलंगाना के लोग काम करेंगे, तो राशि उनके हिस्से जाएगी. छत्तीसगढ़ के मजदूरों का नुकसान होगा. सरकार से आग्रह है कि बीजापुर से तेंदूपत्ता में काम करने वाले तेलंगाना के लोगों की जांच करे. 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों का बीमा बंद कर दिया गया है. सरकार इंश्योरेंस की राशि नहीं पटा रही.

नियमित शिक्षकों की भर्ती के मामले में भी धरमलाल कौशिक ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब कांग्रेस की सरकार बनी, तब नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए 9 मार्च 2019 को विज्ञापन जारी किया गया था. 14 हजार 521 रिक्त पदों को भरने यह विज्ञापन जारी किया गया था. अप्रैल 2019 में नोटिफिकेशन जारी किया गया. जुलाई-अगस्त में परीक्षा आयोजित की गई. नतीजे भी जारी हो गए थे. व्याख्याता भर्ती का सत्यापन भी कर दिया गया. 20 नंवबर को पात्र-अपात्र की सूची घोषित की गई. आज तक नियुक्ति जारी नहीं की गई. इसे लेकर बड़ा आक्रोश है. सरकार ने नौकरी देने की बात कही थी. तत्काल सरकार को यह सूची जारी करनी चाहिए. घोषित होने के बाद भी अधिकार से वंचित किया गया है. उन्होंने कहा कि यह बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का सबसे उपयुक्त समय है. जिनका पंजीयन है, ऐसे लोगों को तत्काल भत्ता दिया जाना चाहिए.

लाॅकडाउन 4.0 को लेकर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सुझाव देते हुए कहा कि लाकडाउन में रियायत देनी चाहिए. केंद्र ने बहुत कुछ राज्य सरकारों पर छोड़ रखा है. आर्थिक गतिविधियां शुरू होनी चाहिए. कई दुकानें बंद हैं, उन्हें भी खोलना चाहिए। केंद्र के पैकेज का लाभ मिलना चाहिए.

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