संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ( UN Human Rights Council ) में भारत ने एक अहम फैसला लिया है। भारत ने चीन, पाकिस्तान और चार अन्य देशों के साथ मिलकर ईरान में प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई की निंदा करने वाले एक प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। यह 47 सदस्यों वाली परिषद में हुआ, जहां प्रस्ताव के पक्ष में 25 वोट पड़े, 7 देशों ने इसके खिलाफ वोट किया और 14 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रस्ताव में ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई की निंदा की गई थी और एक फैक्ट फाइंडिंग मिशन (fact-finding mission) का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया गया था। इस मिशन को पिछले महीने हुई प्रदर्शनों की जांच करने का अधिकार दिया गया था। ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने भारत को उसके ‘सिद्धांतवादी और दृढ़ समर्थन’ के लिए धन्यवाद दिया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान में प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई की निंदा करने वाले प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। यह वोट चीन, पाकिस्तान और चार अन्य देशों के साथ मिलकर दिया गया।
भारत का यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि भारत आमतौर पर किसी देश विशेष के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों का समर्थन नहीं करता है। पहले भी भारत ने ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ वोट किया है। लेकिन इस बार का वोट इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि ईरान अमेरिका के विरोध का सामना कर रहा था और उसे ऐसे समय में समर्थन की सख्त जरूरत थी।
भारत का यह रुख उसके पुराने सिद्धांतों के अनुरूप है। भारत हमेशा से किसी देश के आंतरिक मामलों में दखल न देने के सिद्धांत का पालन करता आया है। इसीलिए, भारत ने पहले भी ऐसे प्रस्तावों के खिलाफ वोट किया है। हालांकि, 2024 में भारत ने ईरान की ओर से जम्मू-कश्मीर (J&K) मुद्दे पर की गई टिप्पणियों के कारण वोटिंग से परहेज किया था। लेकिन 2025 में, ईरान से आश्वासन मिलने के बाद कि वह भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करेगा.
यह ध्यान देने वाली बात है कि जब 2022 में यह फैक्ट फाइंडिंग मिशन स्थापित की गई थी, तब भारत ने इसके खिलाफ वोट नहीं किया था, बल्कि वोटिंग से परहेज किया था। ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने भारत को उसके ‘सिद्धांतवादी और दृढ़ समर्थन’ के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह समर्थन ‘अनुचित और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रस्ताव का विरोध’ करने में भी शामिल था। राजदूत ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत का यह रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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