अभनपुर/थनौद। अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अभनपुर के ग्राम थनौद में व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्र ने ग्रामीणों और शासकीय काव्योपाध्याय हीरालाल महाविद्यालय के छात्रों को संबोधित किया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जादू-टोना, तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत जैसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और समाज को इन अंधविश्वासों से बाहर निकलने की आवश्यकता है.”


अंधविश्वास से निर्दोषों की प्रताड़ना
डॉ. मिश्र ने कहा कि अंधविश्वास और पुरानी कुरीतियों के कारण देश में आज भी कई निर्दोष लोग प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं. डायन, टोनही और जादू-टोने के संदेह में महिलाओं को शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी जाती हैं, कई बार उन्हें गांव से बाहर कर दिया जाता है और कुछ मामलों में हत्या या आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2001 से 2015 के बीच 2604 महिलाओं की मौत डायन प्रताड़ना के कारण हुई, जबकि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हैं.

बीमारी का इलाज झाड़-फूंक नहीं, चिकित्सा से
डॉ. दिनेश मिश्र ने ग्रामीणों से अपील की कि बीमारी या आपदा के समय झाड़-फूंक, ताबीज और टोटकों के बजाय चिकित्सकीय उपचार अपनाएं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे खराब बल्ब, मोटरसाइकिल या टीवी झाड़-फूंक से ठीक नहीं होते, वैसे ही मानव शरीर भी एक मशीन है, जिसका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकते हैं. वायरल बुखार, मलेरिया, दस्त जैसी बीमारियों का कारण और समाधान वैज्ञानिक तरीके से ही संभव है.
बच्चों को डर नहीं, आत्मविश्वास दें
उन्होंने कहा कि बच्चों को भूत-प्रेत और जादू-टोने के नाम पर डराना गलत है, क्योंकि इससे उनके मन में काल्पनिक भय बैठ जाता है. बच्चों को आत्मविश्वास, निर्भयता और तार्किक सोच से जुड़ी कहानियां सुनानी चाहिए. आत्मविश्वासी व्यक्ति पर न तो कथित नजर लगती है और न ही भूत-प्रेत का कोई असर होता है.
चमत्कार भी विज्ञान का खेल
डॉ. मिश्र ने कहा कि तथाकथित चमत्कारों के पीछे या तो सरल वैज्ञानिक प्रक्रियाएं होती हैं या फिर हाथ की सफाई और चालाकी. अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति द्वारा कई ऐसे मामलों की जांच की गई है, जिनमें चमत्कार के नाम पर लोगों से ठगी की गई. उन्होंने टीवी चैनलों पर प्रसारित भूत-प्रेत और अंधविश्वास बढ़ाने वाले धारावाहिकों को भी समाज के लिए नुकसानदेह बताया.
कानून भी करता है अंधविश्वास पर रोक
उन्होंने जानकारी दी कि भारत सरकार के दवा एवं चमत्कारिक उपचार अधिनियम 1954 के तहत झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और चमत्कारिक इलाज का दावा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. इस अधिनियम में पोलियो, लकवा, अंधत्व, मधुमेह, रक्तचाप, सर्पदंश सहित 54 बीमारियां शामिल हैं.
वैज्ञानिक सोच अपनाने की अपील
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मिश्र ने कहा कि अंधविश्वास, पाखंड और सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें छात्रों और आम नागरिकों को आगे आना चाहिए. इस अवसर पर वैज्ञानिक प्रयोगों पर आधारित ट्रिक्स का प्रदर्शन किया गया और ग्रामीणों व छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया. कार्यक्रम में अनंत पांडे ने भी संबोधित किया, जबकि संचालन और आभार प्रदर्शन डॉ. मल्लिका सूर ने किया.
ग्राम थनौद में अंधविश्वास और टोनही प्रताड़ना के खिलाफ अभियान चलाते हुए ग्रामीणों और छात्रों को पॉम्पलेट व पुस्तकें भी वितरित की गईं.
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