SCO Summit 2025, PM Modi in China: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के दौरे पर है। चीन के शहर तियानजिन में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में SCO के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष पहुंच गए हैं। इस बीच एक शानदार और दुनिया की सबसे ताकतवर तस्वीर सामने आई है।

बता दें कि, चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन का आगाज हो चुका है। इस खास मौके पर चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ने अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ शिखर सम्मेलन के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। इस दौरान सदस्य देशों के अन्य राष्ट्राध्यक्षों का भी जिनपिंग ने स्वागत किया। इसके बाद शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं का फोटो सेशन हुआ। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य राष्ट्राध्यक्ष/शासनाध्यक्ष शामिल हुए।

SCO Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात

वहीं, SCO Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई और द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक सीमा पर शांति, व्यापार में सहयोग समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने इस दौरान सीमा पर शांति, आपसी सहयोग और संबंधों की मजबूती पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में कजान में हुई पिछली मुलाकात के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में आए “सकारात्मक माहौल” का स्वागत किया और स्पष्ट किया कि भारत और चीन विकास के साथी हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के लिए अनिवार्य बताया। दोनों नेताओं ने पिछले साल हुए डिसएंगेजमेंट पर संतोष जताया और सीमा विवाद का न्यायसंगत और स्वीकार्य समाधान निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए वीजा सुविधा, सीधी उड़ानों और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली पर जोर दिया। इसके अलावा व्यापार घाटा कम करने और निवेश बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की बातचीत

इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन दोनों अपनी रणनीतिक स्वायत्तता का पालन करते हैं और उनके रिश्तों को किसी तीसरे देश के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने आतंकवाद और निष्पक्ष व्यापार जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा, “पिछले साल कजान में हमारी बहुत ही उपयोगी चर्चा हुई जिसने हमारे संबंधों को सकारात्मक दिशा दी। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना है।”

ग्लोबल ऑर्डर में ये मुलाकात माइलस्टोन बन सकता है!

जानकारों का कहना है कि ग्लोबल ऑर्डर में ये मुलाकात माइलस्टोन बन सकता है. मगर विरोधाभास है जो तीन देशों (भारत-रूस और चीन) के बीच में हमेशा रहा है. इस मुलाकात के बाद ट्रंप की टैरिफ आंधी उड़ पाती है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी. अगर ये होता है तो भारत की जय जय होगी. मगर दूसरी तरह जानकारों का ये भी कहना है कि इस मुलाकात के बाद अगर भारत-चीन के बीच कोर मुद्दा जैसे चीन को पाकिस्तान को सहयोग करना बंद दे, भारत को उसकी जमीन लौटा दे…वगैरह-वगैरह, सुलझ जाए तो अच्छी बात होगी.

SCO समिट पर ट्रंप की पैनी नजर

ट्रंप के द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ के बाद इस समिट को बड़ा माना जा रहा है क्योंकि इस समिट में ट्रंप को छोड़ बाकी सभी महाशक्तियां एक ही मंच पर मौजूद थीं. हाल के समय में भारत और चीन के बीच बढ़ती नजदीकियां को लेकर अमेरिका काफी परेशान है. इसके पीछे की वजह रूसी तेल. अमेरिका नहीं चाहता है कि भारत रूस से तेल खरीदे. उसने हाल ही में इसको लेकर आपत्ति जताई थी. अमेरिका ने कहा था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है और इससे बड़ा मुनाफा कमा रहा है. इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.

भारत ने विरोध जताते हुए कहा था कि यह खरीद वैश्विक बाजार की स्थिति पर आधारित है. भारत ने यह भी कहा कि उसने रूसी तेल खरीदकर वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद की है. अमेरिका और यूरोपीय देशों ने खुद हमारे इस कदम की सराहना की थी. भारत ने कहा कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है. वह रूसी तेल खरीदना जारी रखेगा.

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