नई दिल्ली: यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में दाखिल दस्तावेजों से पता चला है कि राजधानी की 675 झुग्गी बस्तियों में आज भी सीवर लाइन नहीं लगी हैं। इस कारण कचरा और गंदा पानी सीधे नालियों और यमुना में जा रहा है, जिससे नदी की स्थिति और गंभीर होती जा रही है। NGT में दोनों जिम्मेदार एजेंसियों – दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) – ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए कहा कि सीवर लाइन बिछाने की जिम्मेदारी दूसरी एजेंसी की है। दोनों संस्थाओं के बीच यह जिम्मेदारी का विवाद नदी में प्रदूषण की समस्या को और बढ़ा रहा है।
DUSIB और DJB आमने सामने
NGT में दोनों जिम्मेदार एजेंसियों दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) – के बीच जिम्मेदारी का विवाद सामने आया है। DUSIB का कहना है कि झुग्गी बस्तियों में सीवर लाइन बिछाने का काम DJB का है। वहीं, DJB का कहना है कि जब तक DUSIB पहले सीवर नेटवर्क नहीं बनाएगा, तब तक वहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाना संभव नहीं है। इस आपसी टकराव के कारण सालों से समस्या जस की तस बनी हुई है, और यमुना में प्रदूषण की स्थिति पर कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया है। एनजीटी ने दोनों एजेंसियों को जिम्मेदारी तय करने और त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।
14 साल पुराना मामला
यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर करीब 14 साल पुराना मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में अब भी लंबित है। यह मामला निजामुद्दीन वेस्ट एसोसिएशन ने दायर किया था, जिसमें डिफेंस कॉलोनी ड्रेन और बारापुला ब्रिज के जरिए नदी में गिर रहे गंदे पानी का मुद्दा उठाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक यमुना में महरौली, छतरपुर, साकेत और दक्षिणपुरी से आने वाले नालों से रोजाना 17 मिलियन लीटर गंदा पानी बहता है। वहीं, सैदुल्लाजाब नाले से रोजाना 23 मिलियन लीटर बिना ट्रीट किए गए सीवेज यमुना में गिरता है। इसका मतलब यह है कि हर दिन करीब 40 मिलियन लीटर गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा है।
NGT में दोनों जिम्मेदार एजेंसियों – दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) – के बीच जिम्मेदारी का विवाद सामने आया है। DUSIB का कहना है कि झुग्गी बस्तियों में सीवर लाइन बिछाने का काम DJB का है, जबकि DJB का कहना है कि जब तक DUSIB पहले सीवर नेटवर्क नहीं बनाएगा, तब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाना संभव नहीं है। मामले में नगर निगम (MCD) पर भी सवाल उठे हैं। अक्टूबर 2025 में MCD ने NGT को बताया था कि डिफेंस कॉलोनी ड्रेन के सभी खुले रास्ते बंद कर दिए गए हैं। लेकिन इलाके के पूर्व पार्षद अभिषेक दत्त ने मार्च 2026 में मौके की तस्वीरें ट्रिब्यूनल में पेश कीं, जिनमें नाला अब भी खुला दिख रहा है और बैरिकेडिंग अधूरी है।
डिफेंस कॉलोनी के C और D ब्लॉक के लोग इस नाले से निकलने वाली बदबू और जहरीली गैसों का सामना कर रहे हैं। नाले में जमा गंदगी से हाइड्रोजन सल्फाइड और अमोनिया जैसी गैसें निकलती हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष परेशानी होती है। दिल्ली जल बोर्ड ने NGT को बताया है कि सभी 43 नालों को रोककर उनका गंदा पानी ट्रीट करने का काम दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। ट्रिब्यूनल में इस मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।
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