दिल्ली में यमुना नदी का पानी एक बार फिर गंभीर रूप से प्रदूषित हो गया है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बुधवार सुबह वजीराबाद के ऊपरी हिस्से में कच्चे पानी में अमोनिया का स्तर 3 पीपीएम से अधिक दर्ज किया गया।यह स्तर जल बोर्ड द्वारा सुरक्षित मानी जाने वाली अधिकतम 1 पीपीएम की सीमा से तीन गुना ज्यादा है। अधिकारियों का कहना है कि अमोनिया का इतना अधिक स्तर गंभीर प्रदूषण का संकेत है, जो मुख्य रूप से औद्योगिक अपशिष्ट और रासायनिक पदार्थों के नदी में बहाए जाने से पैदा होता है।

उच्च अमोनिया से ट्रीटमेंट में समस्या

जल बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अधिकतम 0.9 पीपीएम तक अमोनिया को सुरक्षित रूप से ट्रीट कर सकते हैं। इससे अधिक अमोनिया होने पर क्लोरीन से न्यूट्रलाइजेशन की प्रक्रिया के दौरान जहरीले क्लोरामाइन कंपाउंड बनने का खतरा बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है। इसी वजह से एहतियात के तौर पर वजीराबाद और चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को कम क्षमता पर चलाया जा रहा है, जिसका असर राजधानी के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है।

क्या है यमुना के प्रदूषण की वजह?

दिल्ली जल बोर्ड का आरोप है कि अमोनिया युक्त केमिकल, डाई और क्लोराइड हरियाणा के पनिपत स्थित इंडस्ट्रियल ड्रेन के जरिए यमुना में पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सोनीपत में फ्रेश वाटर कैनाल और इंडस्ट्रियल वेस्ट कैनाल के बीच केवल रेत की पतली दीवार है, जिससे दोनों के पानी के आपस में मिल जाने की आशंका बनी रहती है।

हालांकि, हरियाणा सरकार इन आरोपों को बार-बार खारिज करती रही है। जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यह समस्या पिछले कई वर्षों से खासतौर पर सर्दियों के मौसम में बार-बार सामने आती रही है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

लोग हो रहे परेशान

नॉर्थ दिल्ली रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक भसीन ने कहा कि कई सरकारें बदल गईं, लेकिन अब तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को अपग्रेड करने या अतिरिक्त बफर स्टोरेज बनाने जैसे ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि यमुना में बढ़ता प्रदूषण न केवल पानी की गुणवत्ता को लगातार खराब कर रहा है, बल्कि राजधानी में बार-बार पेयजल संकट भी पैदा कर रहा है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

पानी की आपूर्ति पर असर

अमोनिया प्रदूषण के चलते वजीराबाद और चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में पानी का उत्पादन 25 से 50 प्रतिशत तक घट गया है। इसका सीधा असर राजधानी की जल आपूर्ति पर पड़ा है। कई इलाकों में कम दबाव पर पानी मिल रहा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। स्थिति को देखते हुए दिल्ली जल बोर्ड ने लोगों से पानी का समझदारी से इस्तेमाल करने की अपील की है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन नंबर 1916 के जरिए टैंकर मंगवाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से प्रभावित क्षेत्र

वजीराबाद प्लांट में उत्पादन घटने के कारण दिल्ली के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इनमें डिफेंस कॉलोनी, मजनू का टीला, ISBT, NDMC क्षेत्र, ITO, हंस भवन, LNJP अस्पताल, CGO कॉम्प्लेक्स, राजघाट, रामलीला मैदान, दिल्ली गेट, सुभाष पार्क, गुलाबी बाग, तिमारपुर, पंजाबी बाग, आजादपुर, शालीमार बाग, वजीरपुर, लॉरेंस रोड, मॉडल टाउन, मूलचंद, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, कैंटोनमेंट के कुछ हिस्से और दक्षिण दिल्ली के अन्य इलाके शामिल हैं।

चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से प्रभावित क्षेत्र

चंद्रावल प्लांट में पानी का उत्पादन घटने के कारण NDMC, करोल बाग, झंडेवालान, हिंदू राव, सिविल लाइंस, पटेल नगर, राजेंद्र नगर और शादीपुर समेत आसपास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है।

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