देहरादून. प्रदेश में शिक्षा की स्थिति को लेकर नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि ‘केवल विद्यालयी शिक्षा ही नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है. प्रदेश के कई पॉलीटेक्निक और आईटीआई संस्थान आज शिक्षकों और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहे हैं. कई संस्थानों में वर्षों से शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, प्रयोगशालाओं और आधुनिक उपकरणों का अभाव है, और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. जब तकनीकी संस्थानों की यह स्थिति होगी, तो स्वाभाविक रूप से वहां से निकलने वाले युवाओं को प्रतिस्पर्धात्मक रोजगार के अवसर प्राप्त करने में कठिनाई होगी.’

ऐसी स्थिति में अपेक्षा थी कि इस बजट में –

  • तकनीकी संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने,
  • आधुनिक उपकरणों और प्रयोगशालाओं की व्यवस्था करने,
  • कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए ठोस पहल की जाएगी.

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लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इन मूलभूत समस्याओं के समाधान के बजाय सरकार केवल रैंकिंग सुधारने की बात कर रही है.

रैंकिंग अपने आप में कोई लक्ष्य नहीं होती. रैंकिंग तब बेहतर होती है जब संस्थानों में-

  • पर्याप्त शिक्षक हों,
  • आधुनिक संसाधन उपलब्ध हों,
  • छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही हो.

यशपाल ने कहा कि ‘यदि बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तो केवल रैंकिंग की चर्चा से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती. मैं यही कहना चाहूंगा कि उत्तराखण्ड के भविष्य का निर्माण उसके बच्चों और युवाओं की शिक्षा से ही होगा. इसलिए सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में केवल प्रतीकात्मक घोषणाओं से आगे बढ़कर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो वास्तव में स्कूलों और तकनीकी संस्थानों को मजबूत करें और प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य प्रदान करें.’