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रायपुर. आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष के दिन योगिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह दिन जून या जुलाई में आता है. योगिनी एकादशी का व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. इसके अलावा अगर कोई मनुष्य श्रद्धा पूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत करता है तो उसके सभी श्राप खत्म हो जाते हैं. योगिनी एकादशी का व्रत करने से सभी प्रकार की बीमारियों से छुटकारा मिलता है और मनुष्य को सुंदर, रूप, गुण और यश प्राप्त होता है. विष्णु पुराण में बताया गया है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को अपने जीवन में सुख समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है.

क्या है योगिनी एकादशी का महत्व?

हिंदू पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है, जिसका उल्लेख पद्म पुराण में भी किया गया है. ऐसा माना जाता है कि जो योगिनी एकादशी व्रत का पालन करता है, वह अपने अतीत और वर्तमान पापों से मुक्त हो जाता है. यह व्रत कई बीमारियों से राहत पाकर भक्तों को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने में मदद करता है. भक्त भगवान विष्णु का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और दीर्घायु व कल्याण के साथ ही धन्य हो जाते हैं. भक्त मोक्ष का मार्ग प्राप्त कर सकते हैं. योगिनी एकादशी का व्रत इसका पालन करने वालों को अपने जीवन में समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और मान्यता प्राप्त करने में मदद करता है.

योगिनी एकादशी व्रत विधि

योगिनी एकादशी के दिन भक्तों या दर्शनार्थियों को उत्सव की रस्मों की शुरुआत करने से पहले जल्दी उठकर पवित्र स्नान करना होता है. सभी अनुष्ठानों को करते समय दृढ़ समर्पण और निष्ठा का होना आवश्यक है. भक्तों को योगिनी एकादशी व्रत का पालन करना चाहिए. भक्तों को भगवान की पूजा-प्रार्थना करनी चाहिए और देवता को अगरबत्ती, फूल और तुलसी के पत्ते भी चढ़ाने चाहिए. व्रत पूरा करने के लिए योगिनी एकादशी की कथा का पाठ करना आवश्यक है. भगवान की आरती की जानी चाहिए और फिर सभी को पवित्र भोजन (प्रसाद) वितरित करना चाहिए. भक्तों को भगवान का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंदिर जाना चाहिए. योगिनी एकादशी व्रत की सभी रस्में दशमी तिथि (दसवें दिन) की पूर्व संध्या पर शुरू होती हैं.

बता दें कि इस विशेष दिन पर, सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए और वह भी सूर्यास्त के समय से पहले. व्रत उस समय तक जारी रहता है जब तक एकादशी तिथि समाप्त होती है. इस व्रत का पालन करने वाले उपासकों को रात में सोने की अनुमति नहीं होती है. भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अपना पूरा समय मंत्रों को पढ़ने में लगाना चाहिए. ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना अत्यधिक शुभ माना जाता है. इस विशेष दिन पर, भक्त भगवान विष्णु की अपार भक्ति करते हैं. योगिनी एकादशी की पूर्व संध्या पर दान करना अत्यधिक फलदायक माना जाता है. ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और पैसे दान करने चाहिए.