प्रयागराज। माघ मेला प्राधिकरण ने धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजा है। जिसमें उन्होंने जवाब मांगा है कि SC की रोक के बावजूद उन्होंने अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ क्यों लगाया है। मेला प्राधिकरण ने कहा कि अभी तक इस संदर्भ में कोई आदेश पारित नहीं हुआ है, ऐसे में कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता। इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला क्षेत्र में लगे शिविर के बोर्ड में अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ लिखा है।
मेला प्राधिकरण ने नोटिस भेजा
मेला प्राधिकरण ने अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के लंबित मुकदमे का जिक्र किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि इस अपील संख्या 3010/2020 JAGAT GURU SHANKRACHARYA JYOTISHPEETH P.S.S.N. SARASWATI VERSUS SWAMI VASUDEVANAND SARASWATI, DISCIPLE OF SILN. SARASWAT ताजा स्थिति के रूप में कोई अन्य आदेश पारित नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में ये मामला विचाराधीन है।
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जब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से अपील का निस्तारण नहीं कर दिया जाता या कोई अग्रिम आदेश पट्टाभिषेक के मामले में पारित नहीं होता, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के तौर पर सुशोभित नहीं हो सकता। इससे यह स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है। इसके बावजूद माघ मेला प्रयागराज 2025-26 में अपने शिविर में लगाये गये बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित प्रदर्शित किया गया है। आप इस कृत्य/प्रदर्शन से मा० उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना दर्शित हो रही है।
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बता दें कि मौनी अमावस्या के अवसर पर शनिवार को संगम पर स्नानार्थियों की भीड़ उमड़ी थी। श्रद्धालु बड़ी संख्या में डुबकी लगाने के लिए पहुंचे जिसके कारण संगम पर गहमागहमी की स्थिति हो गई थी। इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी स्नान के लिए पहुंचे लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। स्नान के लिए रोके जाने पर उनके भक्तों और पुलिस के बीच विवाद शुरू हो गया था। जिसके बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अनशन पर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने कहा था कि ‘संतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, प्रशासन CCTV फुटेज सार्वजनिक करें।

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