रायपुर। बजट सत्र के दौरान विधानसभा में मंत्री मोहम्म अकबर के विभागों के अनुदान मांगों पर चर्चा में शामिल होते हुए भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सबसे पहले सरकारी नमक योजना बंद किये जाने का मामला सदन में उठाते हुए कहा कि गांधी जी की दांडी यात्रा नमक बनाने के लिए नहीं था. वह आंदोलन प्रतीक था. सदियों से नमक का विनिमय चार, चिरौंजी से होता रहा. आज नमक की योजना पूरी तरह बंद कर दी गई. ये योजना स्वास्थ्य और स्वाभिमान का प्रतीक थी.

उन्होंने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार सिर्फ नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी को लेकर ही नेताओं-मंत्रियों के भाषण होंगे. हम सिर्फ काल्पनिक छत्तीसगढ़ में रहेंगे. उज्ज्वला योजना सिर्फ मोदी जी की थी, इसलिए उसे बंद कर दिया गया? सिर्फ राजनीतिक कारणों की वजह से. नाम बदल देते लेकिन योजना चलने दी जाती.

चंद्राकर ने कहा कस्टम मिलिंग में आरओ कटने बन्द हो गए हैं, जिस गति से चल रहा है यह बड़ी क्षति की ओर ले जाएगी. महासमुंद के धान की क्वालिटी की एक बार जांच कराई जाए. किसान खराब धान नहीं बेचता. रखरखाव में गड़बड़ी हुई होगी. बजट में चना के प्रोत्साहन के लिए राशि रखी गई है. नक्सल प्रभावित लोगों की आवास योजना में 1500 करोड़ रुपये की कटौती हुई है.

अजय चंद्राकर ने कहा स्मार्ट सिटी का जनक कोई है तो छत्तीसगढ़ है. एक नया शहर कैसे बन सकता है इसकी कल्पना कहीं हुई तो नया रायपुर के रूप में हुई. आबादी प्रगति का सूचकांक है, लेकिन बजट में आवास के लिए जो प्रावधान किया गया है वह शून्य है. 2003 तक छत्तीसगढ़ में सिर्फ 20 हजार मकान बने थे, 14 सालों में 85 हजार आवास का निर्माण किया गया था. उन्होंने कहा मास्टर प्लान बनाने की गति बेहद धीरे है. विकृत शहरीकरण को रोकना दायित्व है. मैं सोचता हूँ कि मास्टर प्लान यदि जल्द बन जाये तो बेहतर होगा.

पर्यटन को लेकर उन्होंने कहा सीपत, तमनार और सिरपुर तीन विशेष क्षेत्र बनाये थे हमने. यदि ठीक से खुदाई कर दी जाए तो अकेले सिरपुर कमाई वाला पर्यटन क्षेत्र बनेगा.

प्रदूषण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा रायपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स को बेहतर बनाने कोई सिस्टम नहीं है. दिल्ली एक जीता जाता गैस चेम्बर हो गया है. पर्यावरण पर एनजीटी के सुझाव को देखने सुनिश्चित कार्रवाई नहीं की गई. प्रदूषण पूरी दुनिया की वैश्विक समस्या है. छत्तीसगढ़ सरकार ने एक कमेटी बनाई थी. अध्ययन कर बजटीय प्रावधान करने की अनुशंसा की जानी थी, लेकिन दुर्भाग्य से इसे लेकर बजट का प्रावधान नहीं है. खारुन नदी जैसी कई नदियां सूख रही है. छत्तीसगढ़ का वन क्षेत्र निरंतर घटा है,अवैध कटाई नहीं रोका जा सका.