हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा, काली चालीसा, चंडी चालीसा और ना जाने क्या-क्या चालीसा है भाई. इनमें से कुछ चालीसों के बारे में आप जरुर जानते होंगे. जब भी आपको कोई भूत-प्रेत दिख गया होगा तो आपने हनुमान चालीसा जरूर गुनगुनाया होगा. वही जय हनुमान ज्ञान गुन सागर…यदि आप बाबागिरी, दादागिरी, चमचागिरी किसी भी तरह की गिरी में गिरे हुए हैं. या किसी तथाकथित बाबा-गुनिया के आध्यात्मिक किताबों की दुनिया या तमाम संकट मोचन चालीसों के चंगुल में फंस गए हैं. तब इन्हें बांचते-बांचते ही आपका चालीसा पुर जाएगा. एक तो आए दिन नए-नए देवी-देवताओं का अवतार लेना, जन्म लेना उस पर तुर्रा यह कि नए-नए चालीसों का गढ़े जाना. आपका 40 बरस बीत जाएगा इन्हें पढ़ते पढ़ते… मैं तो कहूं आपका 40 बरस टपकते बूंद की तरह रीत जाएगा बेवजह. 

 

एक बात पूछूं- हम जो पूजा करते हैं क्या उसका फल दूसरे को मिलता है. हम भारतीय पूजा करते हैं ज्ञान की देवी सरस्वती माँ की और लगातार ज्ञान के क्षेत्र में चीन क्यों बुलंदी छू रहा है? हम भारतीय पूजा करते हैं विज्ञान के देव विश्वकर्मा भगवान की, और लगातार विज्ञान और टेक्नोलॉजी में जापान दुनिया में आगे क्यों निकलता जा रहा है? हर भारतीय शक्ति की देवियों का उपासक है मगर अमेरिका इतना शक्ति संपन्न कैसे होता जा रहा है? हम पूजा करें वैभव लक्ष्मी की और धन-वैभव-ऐश्वर्य से परिपूर्ण अन्य देश कैसे बनते जा रहे हैं? आपको बता दूँ शिक्षा के केंद्र सत्य के प्रतीक हैं और हर मंदिर-मस्जिद भ्रम के विकसित प्रतिमान. जब तक हम भ्रम से न उबरें सच्चाई हमें दिखाई नहीं देगा. भारत में शिक्षा के केन्द्रों से सौ गुना ज्यादा भ्रम के केंद्र हैं. कोई चालीसों के भ्रम में हैं तो कोई बाबा के भभूत के. खैर ये बात आज यहीं छोड़ते हैं.

 

चालीसा से जुड़ी दूसरी बात करते हैं. आपने ‘न्यूज चालीसा’ का नाम तो शायद ही सुना होगा! आपको बताते चलें ‘न्यूज चालीसा’ एक न्यूज़ वेब पोर्टल है. जो गूगल प्ले स्टोर में एक एप के रूप में भी मौजूद है. जिसे आप डाउनलोड कर हर खबर से अपडेट रह सकते हैं. मगर यह चालीसा भी खबरें कम दिखाता है और मोबाइल की बैटरी ज्यादा खाता है. हालांकि चुनाव के मौसम में ही इन खबर चालीसों का चलना, नए-नए न्यूज़ पोर्टलों का पैदा होना  इनवर्टेड कॉमा वाला एक सवाल उठाता है.’न्यूज चालीसा’ में सरकार के 5हजार दिन पुरे होने की विज्ञापन अब तक रोज देख सकते हैं. खबर चालीसा में अखंड रूप से खबरों की जाप हो न हो मगर सरकार के पांच हजार दिन पुरे होने का जश्न अखंड रूप से आने वाले और पांच हजार दिन तक लगता है जारी रहेगा. खबर चालीसा की जय हो. लोकतंत्र में हर चालीसा चुनाव, राजनीति और व्यापार से जुड़ी होती है. पद्मावती का विवाद चालीसा अब किससे जुड़ी है शायद यह भी आप जानते ही होंगे. जनता को ये बातें गहराई से समझने की जरुरत है. मीडिया से सावधान! मीडिया सबसे ज्यादा भ्रामक है.

 

अब बात करते हैं चुनाव चालीसा की. चौथी पारी के लिए 0004 सीरिज वाली नई-नई गाड़ी खरीदे जा चुके हैं. चौथी पारी, गाड़ियों का नंबर 4, अब आप कीजिए विचार…चुनाव चालीसा शुरू हो चुका है. इस चालीसा में फिर वही घिसी-पिटी नेता होंगे नारे होंगे… फिर गरम माथे के पारे होंगे. मगर क्या करें… चुनाव की चालीसा से तो आप भी नहीं बच सकते. लोकतंत्र हमारा भगवान है जिसके लिए चुनाव चालीसा गढ़े गये हैं. लोकतंत्र में रहना है तो चुनाव चालीसा तो पढ़ना ही होगा. चुनाव चालीसा ही आपके सारे संकट दूर कर सकते हैं. हे जनता जनार्दन! तुम्हारे संकट दूर करने अगर पिछले तीन बार से चुनाव चालीसा सही पढ़ा गया है तब चौथी बार भी सही पढ़ देना. हे जनता जनार्दन! यदि चुनाव चालीसा गलत पढ़ने की भूल लगातार तीन बार से हुई हो तो यह भूल चौथी बार मत करना. एक भूल का नतीजा बराबर 5 साल झेलना होता है. सावधान! चुनावी मौसम नजदीक है. अब तक पढ़े गए चुनाव चालीसा की समीक्षा करने का वक्त आ गया है. जय हो जनता जनार्दन की…जय हो चुनाव चालीसा की… आज बस इतना ही… फिर मिलेंगे…

-कंचन ज्वाला कुंदन