संपादकीय तल्ख टिप्पणी : ठीक किया, पेड़ काट दिए साहेब ! वैसे भी मुर्दों के शहर में ज़िंदा पेड़ों के क्या काम ?
संपादकीय फेसबुकिया, व्हाट्सेपिया, ट्वीटरिया, यूट्यूबिया, गूगलिया, इन्स्टाग्रामिया जैसे नए समाज का अभ्युदय !