अजयारविंद नामदेव, शहडोल। आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले में गुमशुदगी के आंकड़े पुलिस की चिंता बढ़ाने वाले हैं। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से 182 महिला-पुरुष लापता हैं, लेकिन लंबे समय तक तलाश और पुलिस की कोशिशों के बावजूद इनका अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। हालात यह हैं कि अब पुलिस ने इन गुमशुदा लोगों को तलाशने के लिए आम लोगों से मदद मांगी है और जानकारी देने वाले को 5 हजार का इनाम देने की घोषणा की है।
पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय अग्रवाल की ओर से 5 अक्टूबर को जारी उद्घोषणा में गुमशुदा महिला और पुरुषों की लंबी सूची सामने आई है। इसमें जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों की जानकारी शामिल है। सूची में गुम इंसान क्रमांक, गुम होने की तारीख, मामला दर्ज होने की तारीख और गुमशुदा व्यक्ति का नाम-पता सहित अन्य विवरण दर्ज हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 182 लोगों की तलाश में पुलिस के तमाम प्रयास कहां तक पहुंचे? कई मामलों में लंबे समय से गुमशुदा लोगों का पता नहीं चल पाने के बाद अब पुलिस को उनकी तलाश के लिए इनाम की घोषणा कर आम लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे पुलिस की गुमशुदगी मामलों में की जा रही निगरानी और जांच व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पुलिस ने पुलिस रेग्युलेशन के पैरा 80 बी (1) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए इनाम घोषित किया है। उद्घोषणा के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति यदि किसी गुमशुदा महिला या पुरुष के संबंध में ऐसी विश्वसनीय जानकारी देता है, जिससे उसकी दस्तयाबी संभव हो सके, तो उसे 5 हजार की इनाम राशि दी जा सकती है।
जारी सूची में कई गुमशुदगी के मामले वर्ष 2026 के हैं और जून से अक्टूबर तक की तारीखें दर्ज हैं। यानी कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें गुमशुदगी के बाद भी अब तक कोई ठोस सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा है।
अब सवाल सिर्फ 182 गुमशुदा लोगों का नहीं, बल्कि उन परिवारों का भी है जो महीनों से अपने अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। इनाम की घोषणा से क्या लापता लोगों की तलाश तेज होगी या यह पुलिस की नाकामी का आईना है। इसका जवाब आने वाले दिनों में इन मामलों की जांच और दस्तयाबी के आंकड़े ही देंगे।
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