पुरूषोत्तम पात्र, गरियाबंद. लुप्त हो रही आदिवासी परंपरा को सार्वजनिक पटल पर रखने के उद्देश्य से जिला स्तरीय आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई. प्रतियोगिता में कमार भुजिया कलाकारों की प्रस्तुति ने लोगों का मन मोह लिया. आदिवासी परंपरा व ग्रामीण अंचल में छुपी प्रतिभा को सामने लाने का ऐसा अनूठा प्रयास पहली बार हुआ है. शुक्रवार को मैनपुर के फारेस्ट कॉलनी में आदिवासी विकास विभाग के नेतृत्व में यह आयोजन किया गया.

आयोजन में जिले भर के 9 दलों ने भाग लिया. कला की बेहतर प्रदर्शन कर टेवारी के भूंजीय नर्तक दल ने प्रथम स्थान, कोकड़ी मैनपुर के मांदरी नर्तक दल द्वितीय, देवरी के कमार नर्तक दल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. सभी विजयी दल को अतिथियों ने शील्ड व प्रशस्ति पत्र भेंट किया.

भूपेश सरकार के इस पहल की हुई सराहना

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एकीकृत परियोजना वित्त विकास समिति के अध्यक्ष धनेश्वरी मरकाम ने भूपेश सरकार को इस आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित कर ऐसे आयोजन से विलुप्त होती परम्परा सामने आने की बात कही. कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रही जीप के वन समिति सभापति लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि छुपी प्रतिभा को अब मंच मिलेगा. इससे आदिवासी भाइयों को कला के क्षेत्र में आगे जाने का अवसर मिलेगा.

 

विशिष्ट अतिथि संजय नेताम ने कहा कि सरकार के इस पहल से आदिवासी परम्परा की लोकप्रियता ऊंचाइयों को छुएगी. आयोजन में विशेष अतिथि के रूप में मनोज मिश्रा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष, नीलकंठ ठाकुर, कस्तूरा नायक, सरपंच मैनपुर
प्रवीण बम्बोडे, खेदूराम, जनमेजय, नरेंद्र ध्रुव, कौशल ठाकुर सहित जिले भर के प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे.