गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र में एक ही पते पर 22 फर्जी पासपोर्ट जारी कराने के मामले का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, मास्टरमाइंड प्रति पासपोर्ट करीब डेढ़ लाख रुपये लेकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का ठेका लेता था। जांच में सामने आया कि एक ही पते का इस्तेमाल कर कई लोगों के पासपोर्ट तैयार कराए गए। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह में भोजपुर थाने का एक डाक मुंशी भी शामिल है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जामिया नगर निवासी मुस्ताक अहमद और दरियागंज निवासी मुदासिर खान के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, मुस्ताक पहले ख्याला में भी रह चुका है। वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था और साथ ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का नेटवर्क चला रहा था। पूछताछ में मुस्ताक ने खुलासा किया कि वह प्रत्येक ग्राहक से फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये वसूलता था। गिरोह एक ही पते का इस्तेमाल कर कई लोगों के पासपोर्ट तैयार करा रहा था।

हर सदस्य की जिम्मेदारी तय

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह में हर सदस्य की जिम्मेदारी तय थी और उसी आधार पर रकम का बंटवारा किया जाता था। मुस्ताक अहमद मास्टरमाइंड था, जो प्रति पासपोर्ट करीब डेढ़ लाख रुपये लेता था। मुदासिर खान का काम ग्राहक लाना था। उसे प्रति पासपोर्ट 25 हजार रुपये मिलते थे। फर्जी दस्तावेज तैयार होने के बाद पासपोर्ट बनवाने की पूरी प्रक्रिया गिरोह का सदस्य विवेक गांधी देखता था। पुलिस उसे पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह में भोजपुर थाने का एक डाक मुंशी भी शामिल है, जो फिलहाल फरार है। उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

पूछताछ में क्या बताया

पूछताछ में मुदासिर ने बताया कि वह मूलरूप से बटमालू (श्रीनगर) का निवासी है और पिछले कई वर्षों से दरियागंज में रहकर कैब चालक का काम कर रहा था।वर्ष 2019 में फर्जी कागजात बनवाने के सिलसिले में उसकी मुलाकात मुस्ताक से हुई। इसके बाद दोनों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का संगठित गिरोह खड़ा कर लिया।

 इस तरह चलता था पूरा नेटवर्क

एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पासपोर्ट के आवेदन अपने ही मोबाइल नंबरों से किए जाते थे। जांच में पाया गया कि 22 पासपोर्ट में से 13 आवेदन एक ही मोबाइल नंबर से किए गए। 6 आवेदन दूसरे नंबर से किए गए। जबकि 2 आवेदन एक अलग नंबर से किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार करते थे। इन्हीं नकली दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जाता था।

पुलिस का कहना है कि इस संगठित नेटवर्क में हर सदस्य की भूमिका तय थी और उसी के अनुसार रकम का बंटवारा किया जाता था। मामले में अब तक मास्टरमाइंड समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी पहले ही जेल भेजा जा चुका है और एक डाक मुंशी फरार है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m