हेमंत शर्मा, इंदौर। मानपुर फार्महाउस जुआकांड अब पुलिस कार्रवाई से निकलकर सीधे हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस पर जुआ पकड़े मामले में सस्पेंड टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि उन्हें सिर्फ इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि उन्होंने एफआईआर में सही जगह और सही नाम लिखने से इनकार नहीं किया।
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मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी
टीआई ने याचिका में साफ कहा है कि घटना के बाद उन पर लगातार दबाव बनाया गया कि फार्महाउस का नाम एफआईआर से हटाया जाए और स्थान बदल दिया जाए, लेकिन उन्होंने नियमानुसार कार्रवाई की और सही तथ्य दर्ज किए। इसके बाद ही उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। गुरुवार को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें शासन की तरफ से जवाब पेश किया गया। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह विभाग, डीजीपी, आईजी ग्रामीण, एसपी ग्रामीण, एडिशनल एसपी और एसडीओपी को पक्षकार बनाते हुए जवाब तलब किया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।
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प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग
याचिका में टीआई ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से प्रभाव में आकर की गई है और यह प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग है। उन्होंने लिखा कि एफआईआर में बदलाव नहीं करने की वजह से उन्हें सस्पेंड किया और मामले की जांच भी ऐसे अधिकारी को दे दी गई जो उनके वरिष्ठों के अधीन काम करते हैं। टीआई ने सवाल उठाया कि एएसआई रेशम गिरवाल को भी सस्पेंड कर दिया, जबकि वे 21 फरवरी से बीमारी के कारण छुट्टी पर और घटना के समय ड्यूटी पर नहीं थीं। उन्होंने इसे बिना जांच और बिना विवेक के लिया गया फैसला बताया। याचिका में यह भी कहा गया कि जुआ पकड़ने की कार्रवाई के समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि फार्महाउस आईएएस वंदना वैद्य का है।
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कार्रवाई नियम से नहीं, बल्कि दबाव में की गई
जब यह बात सामने आई तो उन पर फोन और मैसेज के जरिए दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया।गौरतलब है कि 10-11 मार्च की रात मानपुर स्थित फार्महाउस पर जुआ पकड़े जाने के बाद 11 मार्च को एसपी यांगचेन डोलकर भाटिया ने टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे, एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को सस्पेंड कर दिया था।अब मामला हाईकोर्ट में पहुंच चुका है और 1 अप्रैल की सुनवाई को इस पूरे जुआकांड में बड़ा मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार सस्पेंड टीआई ने खुलकर आरोप लगाया है कि कार्रवाई नियम से नहीं, बल्कि दबाव में की गई।




