रायपुर- कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज बैठक बुलाकर गिलोटिन का इस्तेमाल कर भूपेश सरकार ने बजट पारित कर दिया. कोरोना के खतरों को देखते हुए विपक्षी सदस्यों ने भी इस पर अपना समर्थन दिया, लेकिन 28 विधेयकों पर चर्चा नहीं कराए जाने से बीजेपी सदस्यों ने गहरी नाराजगी जाहिर की है. विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा है संसदीय इतिहास का यह दुर्भाग्यजनक दिन है, जहां राजनीतिक उद्देश्यों के लिए विधानसभा का उपयोग किया गया.

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि-

विधानसभा का संचालन नियम और प्रक्रियाओं से चलता है, लेकिन भूपेश सरकार ने नई कार्यप्रणाली शुरू कर दी है. जो परंपराएं सबने मिलकर बनाई थी, वह अब टूटती जा रही है. देश में कोरोना के बढ़ते असर से हर कोई चिंतित है, हमने भी बगैर चर्चा बजट पारित कराया जाए. विपक्ष चाहता था कि आने वाले वक्त में राज्य की आर्थिक स्थिति प्रभावित ना हो, लेकिन कार्यसूची में संशोधन विधेयकों को लिस्ट कर उन्हें चर्चा के बगैर पारित किया जाना उचित नहीं है. सरकार ने खुद आज विधानसभा के नियमों की धज्जियां उड़ाई है. संसदीय परंपराओं को आगे बढ़ाने की बात होती है, लेकिन इसे तोड़ने की कोशिश की जा रही है. यह चिंता की बात है. कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय का नाम बदलकर चंदूलाल चंद्राकर के नाम पर किया गया, जबकि इसका उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने किया था. सरकार समाज में द्वेष फैलाना चाहती है. वर्ग संघर्ष के लिए प्रेरित करने का काम सरकार कर रही है. हम चाहते थे कि चंदूलाल चंद्राकर राज्य की विभूति हैं, उनके नाम पर सरकार एक नए संस्थान की स्थापना करे, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के लिए ऐसा किया जाना समझ के परे हैं. राज्य की राजनीतिक का आने वाला दौर बेहद खराब होता नजर आ रहा है. इससे पहले भी सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन पर ही उनके नाम पर बने संस्थान का नाम बदला था.

वरिष्ठ बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि-

संसदीय इतिहास का यह दुर्भाग्यजनक दिन है कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए लिए विधानसभा का उपयोग किया जा रहा है. यह पहली बार हुआ है कि कार्य मंत्रणा समिति के प्रस्ताव को डिविजन में लिया हो. बजट पारित करना आवश्यक था. चाहते तो अध्यादेश पारित कर विनियोग विधेयक पारित कर सकते थे. लेकिन 28 संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए बैठक हुई. गलत परंपरा लगातार डाली जा रही है. राजनीतिक स्वार्थों के लिए इस सरकार ने कुशाभाऊ ठाकरे जैसे महामना के नाम पर बने विश्वविद्यालय का नाम बदल दिया. कामधेनू को देश भगवान स्वरूप में पुजता है. उस नाम पर बने विश्वविद्यालय का नाम बदल दिया गया. कोरोना की आड़ में यह सब किया जा रहा है.

पूर्व मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि-

सरकार से यह जानने की कोशिश की जानी चाहिए कि नियम परंपराओं को तोड़कर 28 बिल जो लाया गया, उसमें से कौन सा बिल लोक महत्व का है. चंदूलाल या वासुदेव जी छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र है, लेकिन क्या एक स्थापित संस्थान का नाम बदलना जरूरी था? क्या सरकार के पास कोई विजन नहीं है कि नया संस्थान बना सके? चोरी छिपे सरकार अपने इन एजेंडों को पूरा करना चाहती है? कोरोना शब्द का दुरूपयोग विधानसभा में सरकार कर रही है. हमने कहा कि कोरोना के खिलाफ लडा़ई में विपक्ष साथ है, लेकिन दैनंदिनी कार्य में भी ये कोरोना-कोरोना कह रहे हैं.