बुलंदशहर की खुर्जा पुलिस ने 1997 में लापता हुए ब्रह्मजीत की हत्या के मामले का 28 साल बाद खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार आरोपियों ने जमीन विवाद में हत्या कर शव छिपाने और बाद में गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबे समय तक छिपकर रहने की बात कबूली है.

बुलंदशहर. जिले में खुर्जा पुलिस ने 1997 में हुए एक हत्याकांड का 28 साल बाद खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार गिरफ्तार तारा सिंह और रमेश ने पूछताछ में अपने दोस्त ब्रह्मजीत की हत्या करने की बात स्वीकार की है. दोनों आरोपी खुर्जा नगर थाना क्षेत्र के ग्राम भिंडौर के रहने वाले हैं.

पुलिस के मुताबिक वर्ष 1997 में भिंडौर के तीन युवक गौतमबुद्धनगर में रहकर छोटी-मोटी नौकरी करते थे. 9 अक्टूबर 1997 को तीनों मेला देखने के लिए खुर्जा आए थे, जिसके बाद ब्रह्मजीत वापस नहीं लौटा.

गुमशुदगी के बाद दोनों भी गायब

ब्रह्मजीत के साथ आए दोनों युवकों ने गौतमबुद्धनगर में उसके अचानक लापता होने की सूचना देकर गुमशुदगी दर्ज कराई थी. पुलिस उसकी तलाश कर ही रही थी कि गुमशुदगी दर्ज कराने वाले दोनों युवक भी गायब हो गए.

काफी खोजबीन के बावजूद तीनों का पता नहीं चल सका. समय बीतने के साथ मामले की जांच भी आगे नहीं बढ़ सकी.

अगस्त में मिला सुराग

अगस्त 2026 में ग्रामीणों ने खुर्जा क्षेत्र के आसपास एक आरोपी को देखा. इसकी जानकारी ब्रह्मजीत के भाई सुरजीत को दी गई, जिसके बाद उसने गौतमबुद्धनगर के सेक्टर-39 थाने में अपने भाई की हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई.

सीओ खुर्जा शोभित कुमार अत्री के अनुसार 17 अगस्त 2026 को थाना सेक्टर-39, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर में जीरो एफआईआर दर्ज हुई थी. यह एफआईआर 25 अगस्त 2026 को खुर्जा नगर थाने पहुंची. शिकायत में सुरजीत ने आरोप लगाया था कि 9 अक्टूबर 1997 को ब्रह्मजीत, छलेरा और आरोपी रमेश गौतमबुद्धनगर से मेला देखने खुर्जा आए थे और इसी दौरान ब्रह्मजीत की हत्या कर शव कहीं छिपा दिया गया.

पूछताछ में हत्या कबूली

मामला खुर्जा थाने में आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की. रविवार को पुलिस ने तारा सिंह और रमेश को मधुपुरा मोड़ से गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस के अनुसार पूछताछ में दोनों ने हत्या की बात स्वीकार की. आरोपियों ने बताया कि ब्रह्मजीत के साथ उनका जमीन को लेकर विवाद था. इसी विवाद के चलते उन्होंने कैंची से वार कर उसकी हत्या कर दी और शव को छिपाने के बाद वापस गौतमबुद्धनगर चले गए.

आरोपियों के मुताबिक ब्रह्मजीत की गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद वे खुद भी छिपकर रहने लगे, ताकि हत्या का राज सामने न आए. कोतवाली खुर्जा नगर प्रभारी रामफल सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है.