पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध के बीच फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने का सिलसिला तेज हो गया है। शनिवार शाम चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय भावुक दृश्य देखने को मिले, जब 345 भारतीय मछुआरों का एक बड़ा समूह सुरक्षित स्वदेश लौटा। ये सभी मछुआरे युद्ध के कारण ईरान में फंस गए थे और वीडियो संदेशों के जरिए सरकार से बचाने की गुहार लगा रहे थे।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भारी तनाव के बीच ईरान में फंसे तमिलनाडु के 345 मछुआरों के लिए शनिवार की शाम राहत की खबर लेकर आई। भारत सरकार ने एक विशेष बचाव अभियान के तहत इन मछुआरों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित चेन्नई लाया है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस सफल अभियान के लिए आर्मेनिया की सरकार और अपने समकक्ष अरारत मिर्जोयान का विशेष आभार व्यक्त किया है। ईरान में हवाई सेवाएं और सीधे रास्ते प्रभावित होने के कारण, इन मछुआरों को पहले जमीनी रास्ते से आर्मेनिया ले जाया गया, जहां से उन्हें विमान के जरिए भारत लाया गया। गौरतलब है कि पिछले एक महीने में अब तक 1,150 से अधिक भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान के जमीनी रास्ते से ईरान छोड़ चुके हैं।

तमिलनाडु भाजपा के सूत्रों के अनुसार, इस पूरे बचाव अभियान का समन्वय केंद्र सरकार और पार्टी ने किया। फंसे हुए मछुआरों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए हवाई टिकटों का लगभग 3.25 करोड़ रुपये का पूरा खर्च भाजपा ने वहन किया है। चेन्नई पहुंचने पर मछुआरों को भोजन, कपड़े और उनके पैतृक गांवों तक पहुंचाने के लिए विशेष बसों की सुविधा भी प्रदान की गई। भाजपा के तमिलनाडु चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल ने इस अभियान को प्रधानमंत्री मोदी के विजन का प्रतिबिंब बताया है।

मछुआरों की सफल वापसी के बीच विदेश मंत्रालय अबू धाबी में हुए मिसाइल हमले की स्थिति पर भी नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को एक मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें 5 भारतीय नागरिक शामिल हैं। सरकार ने पुष्टि की है कि घायल भारतीयों में से 4 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक का इलाज अभी जारी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय समुदाय की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नयनार नागेंद्रन जो कि भाजपा की तमिलनाडु इकाई के प्रमुख हैं, ने बताया कि चेन्नई पहुंचने से पहले इन मछुआरों को आर्मेनिया तक पहुंचने के लिए 20 घंटे का लंबा सफर तय करना पड़ा। इस समूह में केवल तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि केरल, पुडुचेरी, गुजरात और ओडिशा के भी लगभग 20 मछुआरे शामिल हैं। सुरक्षित लौटे मछुआरों ने सरकार और पार्टी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि युद्ध के मैदान में काम बंद होने के बाद वे बेहद डरे हुए थे।

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