राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर बड़ी पहचान मिली है। यूनेस्को की विश्व धरोहरों की अस्थायी सूची (टेंटेटिव लिस्ट) में प्रदेश के चार और ऐतिहासिक स्थलों को शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही यूनेस्को की इस सूची में मध्य प्रदेश के कुल धरोहरों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है, जो देश के किसी भी राज्य के मुकाबले एक बड़ी उपलब्धि है। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हुईं। विदिशा जिले के उदयगिरी के गुफा मंदिर, धार जिले की बाघ गुफाओं की चित्रकारी, मुरैना जिले के बटेश्वर मंदिर समूह
और सीहोर जिले के गिन्नौरगढ़ का किला शामिल किया गया है। यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भारत की कुल 78 अस्थायी धरोहर में से मध्यप्रदेश की 19 धरोहर है।
बाघ गुफाएं- धार जिले में बाघ नदी के किनारे स्थित नौ बौद्ध गुफाओं का यह समूह चौथी से छठी शताब्दी का माना जाता है. गुफा संख्या चार यानी रंग महल के भित्ति चित्रों में दरबार, जुलूस, संगीतकार, नर्तक और तत्कालीन सामाजिक जीवन के दृश्य दिखाई देते हैं.
गिन्नौरगढ़ का किला- सीहोर जिले के रातापानी के वन क्षेत्र में पहाड़ी पर स्थित गिन्नौरगढ़ किला गोंड शासन की स्थापत्य और प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण उदाहरण है.
बटेश्वर मंदिर समूह- मुरैना का बटेश्वर पदावली ककरामठ समूह आठवीं से 11वीं शताब्दी की मंदिर वास्तुकला है.
उदयगिरि गुफा मंदिर
विदिशा के पास स्थित उदयगिरि में पत्थरों को काटकर बनाए गए 20 गुफा मंदिर हैं. यहां मंदिर, मूर्ति, शिलालेख और प्राकृतिक भू-दृश्य का अनूठा मेल दिखाई देता है. वराह प्रतिमा गुप्तकालीन धार्मिक कला, वैष्णव परंपरा और राजसत्ता की अभिव्यक्ति माना जाता है.
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