पलामू। झारखंड के पलामू जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सर्दी-खांसी से परेशान चार साल के इकलौते बेटे का इलाज कराने निजी क्लीनिक पहुंचे माता-पिता की खुशियां कुछ ही देर में मातम में बदल गईं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि मनातू स्थित एक निजी क्लीनिक में कथित झोलाछाप चिकित्सक ने बच्चे को हायर एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई। वह बेचैन होकर छटपटाने लगा और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। आनन-फानन में परिजन उसे मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी हालत, अस्पताल पहुंचने से पहले टूटी सांसें

परिजनों के मुताबिक, बच्चा सर्दी-खांसी से परेशान था। इसी परेशानी के इलाज के लिए वे उसे मनातू के एक निजी क्लीनिक लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां बच्चे को एंटीबायोटिक इंजेक्शन दिया गया। इसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। बच्चे की हालत देखकर माता-पिता घबरा गए और उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि, बच्चे की मौत का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

इकलौते बेटे की मौत से परिवार में मचा कोहराम

चार वर्षीय यंश की मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता-पिता समेत परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बच्चे की किलकारियों से घर गुलजार रहता था, उसकी असमय मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया है।

बताया जाता है कि मिथिलेश यादव झारखंड मुक्ति मोर्चा के पंचायत सचिव हैं। यंश परिवार का इकलौता बेटा था। करीब एक माह पहले ही उसके दादा का निधन हुआ था। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि इकलौते बेटे की मौत ने उसे गहरे दुख में डुबो दिया।

निजी क्लीनिकों की वैधता और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल

घटना के बाद मनातू में संचालित निजी क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई ऐसे क्लीनिक संचालित हैं, जिनके पंजीकरण और वहां इलाज करने वाले चिकित्सकों की योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को निजी क्लीनिकों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और योग्य चिकित्सकों से इलाज सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की बड़ी जिम्मेदारी है।

पहले भी अवैध क्लीनिकों पर हो चुकी है कार्रवाई

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले उपायुक्त के निर्देश पर पलामू जिले के विभिन्न प्रखंडों में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम और क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस दौरान कुछ संस्थानों को सील भी किया गया था। इसके बावजूद मनातू में इस तरह की घटना सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चार साल के मासूम की मौत ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप चिकित्सकों के बढ़ते खतरे और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।