भुवनेश्वर: शुक्रवार को ओडिशा से अयोध्या के लिए 235 किलो के गोल्डन धनुष ‘कोदंड’ को पूरे रीति-रिवाज के साथ भेजा गया, जो राज्य के लिए धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक गौरव का पल है. इस पवित्र धनुष को राउरकेला के हनुमान वाटिका से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और यह राम जन्मभूमि पर अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंचने से पहले ओडिशा के सभी 30 जिलों से होकर गुजरेगा.

सोना, चांदी, एल्युमिनियम, जिंक और लोहे जैसे ‘पंचधातु’ से बना यह धनुष भक्ति, कला और राष्ट्रीय भावना का संगम है. इस पर भारत के सैन्य इतिहास के खास पलों, जैसे कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक, के साथ-साथ शहीद सैनिकों के नाम भी लिखे हुए हैं. इस अनोखी कलाकृति को देखने के लिए विदाई समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हुए हैं.

8 फीट लंबा और लगभग साढ़े तीन फीट चौड़ा, कोदंड शक्ति और सम्मान का प्रतीक है. इसे तमिलनाडु के कांचीपुरम की 40 महिला कारीगरों ने बहुत बारीकी से बनाया है, जो पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक कारीगरी को दर्शाता है. तय कार्यक्रम के अनुसार, यह धनुष 22 जनवरी को अयोध्या पहुंचने की उम्मीद है.

जुलूस के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने ओडिशा भर के लोगों से अपील की है कि जब यह धनुष राज्य से गुजरे तो वे दीये जलाएं और प्रार्थना करें, ताकि यह सुरक्षित और शुभ रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचे.