रायपुर. धोखाधड़ी के 10 साल पुराने मामले के आरोपी डॉक्टर प्रमोद सिंह को न्यायालय ने दोषमुक्त माना है. साथ ही इस मामले में अन्य अभियुक्त नितिन आहूजा और ओपी वर्मा को भी रिहा कर दिया गया है.

धारा-420 के केस में फंसे डॉक्टर प्रमोद सिंह पिछले 10 साल से परेशान थे. मामला 2007- 08 से लंबित था. एडवोकेट आनंद मोहन ठाकुर ने बताया कि डॉक्टर प्रमोद सिंह स्वास्थ्य संचालक विभाग में संचालक के पद पर पदस्थ थे.

शासन द्वारा उनके विरुद्ध धारा 420 467 468 471 409 120 बी के अंतर्गत एफ आई आर दर्ज की थी और उसका विचारण न्यायालय में लंबित था. डॉ प्रमोद सिंह की ओर से ठाकुर आनंद मोहन सिंह दारा पैरवी की गई थी. विशेष न्यायाधीश श्री नंदे के न्यायालय में सारे तथ्यों सबूतों एवं गवाहों के विचारण के पश्चात न्यायालय ने डॉ प्रमोद सिंह को दोषमुक्त कर दिया.

डॉ प्रमोद सिंह छत्तीसगढ़ शासन से विगत 10 वर्षों से निष्कासित है तथा उनके विरुद्ध न्यायालय में अभियोग लगाया गया था कि स्वास्थ्य संचालनालय विभाग में जो माइक्रोस्कोप कथा स्टीरप पंप उपकरणों की सप्लाई की गई थी व जाली फर्जी थी. इस मामले में डॉक्टर प्रमोद सिंह को दोषी बनाया गया था परंतु न्यायालय द्वारा अपना अंतिम निर्णय पारित करते हुए डॉ प्रमोद सिंह को दोषी नहीं पाया.

साथ ही उनके विरुद्ध लगाई गई सारी धाराओं को निरस्त करते हुए उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया गया है. न्यायालय द्वारा इसी प्रकरण में अन्य अभियुक्त नितिन आहूजा तथा ओपी वर्मा को भी रिहा कर दिया.

साथ ही एडवोकेट आनंद मोहन ठाकुर ने यह जानकारी भी दी कि कि डॉ प्रमोद सिंह के पिता कांग्रेस के कद्दावर मंत्री थे. उनके पिता एमपी और गुजरात सरकार में  पांच बार मंत्री थे.