Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने मोती डूंगरी के पास बताशे वालों की बगीची से जुड़े स्वामित्व मामले में अदालत के आदेश के बावजूद आपत्तियों का निस्तारण न करने पर तत्कालीन यूडीएच सचिव टी. रविकांत, ग्रेटर नगर निगम आयुक्त रुक्मणी रियाड और मालवीय नगर जोन के उपायुक्त अर्शदीप बरार को अवमानना नोटिस जारी किया है। जस्टिस उमाशंकर व्यास की एकलपीठ ने यह आदेश जयसिंह सैनी की अवमानना याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विमल चौधरी और योगेश कुमार टेलर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के परिवार का मोती डूंगरी के पास स्थित बताशे वालों की बगीची पर पीढ़ियों से कब्जा है। 16 अगस्त, 1934 को तत्कालीन मयखाना खास जयपुर कौंसिल ने 2.17 बीघा जमीन को धार्मिक श्रेणी में दर्ज किया था। 2 मार्च, 1951 को हुए सिटी सर्वे में भी इसे धार्मिक भूमि के रूप में मान्यता दी गई थी।
याचिका में कहा गया कि पहले इस भूमि का रखरखाव बताशे वालों की कमेटी द्वारा किया जाना तय हुआ था, लेकिन 1 जनवरी, 1966 को एक प्रस्ताव पारित कर भूमि का स्वामित्व श्री हलवाई समिति को सौंप दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत इस भूमि का पट्टा लेने के लिए आवेदन किया। निगम ने इसके लिए आम सूचना जारी कर आपत्तियां मांगी, लेकिन हलवाई समिति की 2 नवंबर, 2021 को दर्ज आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया गया और याचिकाकर्ता को पट्टा जारी नहीं किया गया।
इस पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद 23 फरवरी को अदालत ने निगम को तीन माह के भीतर आपत्तियों का निस्तारण करने का आदेश दिया था। हालांकि, आदेश का पालन नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए।
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