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कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। शहर के जीवाजी विश्वविद्यालय में भूत दिखाई दिया है। आप सुनकर हैरान हो रहे होंगे लेकिन यह सच है की विश्वविद्यालय में रात के वक्त भूत दिखाई दिया। एक भूत कुछ भूतिया लोगों के साथ खड़ा हुआ नजर आया, पास में एक ब्लैकबोर्ड भी दिखाई दिया जिस पर कुछ लिखा हुआ है। यह तस्वीर रात के अंधेरे में अचानक से किसी के भी रोंगटे खड़े कर डरा सकती है, यह सब जीवाजी विश्वविद्यालय के गेट नंबर 2 के बाहर देर रात दिखाई दिया। जो भी राहगीर वहां से गुजरे वहीं रुक गए। क्योंकि एक भूत कुछ भूतिया छात्रों को पढ़ाता हुआ दिखाई दिया।
फर्जी तरीके से 15 साल तक सम्बद्धता दी
बता दें कि जीवाजी विश्विद्यालय के सम्बद्धता फर्जीवाड़े और घोटालो के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। मानसेवी प्रोफेसर डॉ अरुण शर्मा ने यह प्रदर्शन जीवाजी विश्विद्यालय के गेट नम्बर 02 के बाहर देर रात किया। उनके साथ दो छात्र भी मौजूद रहे। प्रदर्शन में अरुण शर्मा भूत की वेशभूषा धारण कर भूतिया छात्रों को पढ़ाते हुए नजर आए। उन्होंने यह प्रदर्शन इसलिए किया क्योंकि जीवाजी विश्वविद्यालय ने मुरैना जिले के झुंडपुरा स्थित शिवशक्ति कॉलेज को फर्जी तरीके से 15 साल तक सम्बद्धता दी जो वास्तविकता में फिजिकल तौर पर जमीन पर ना ही बना था ना ही मौजूद था। कागजों में संचालित इस कॉलेज में कागजों में ही छात्रों के एडमिशन हुए और करोड़ों रुपए की स्कॉलरशिप भी निकाल ली गई। हद तो तब हो गई जब डॉ अरुण शर्मा को उस कॉलेज का प्रिंसिपल बनाकर उनके नाम से बैंक अकाउंट खोले गए और 15 सालों तक सैलरी भी डालकर निकाली जाती रही।
EOW में मामले की शिकायत
प्रोफेसर अरुण शर्मा को जब खुद के साथ हुए विश्वविद्यालय की इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ तो उन्होंने EOW में मामले की शिकायत की थी। EOW ने जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु अविनाश तिवारी सहित 17 प्रोफेसर्स के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था। लगातार आंदोलन के बाद राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने अविनाश तिवारी सहित विश्वविद्यालय के सभी EC मेम्बर्स को बर्खास्त करते हुए धारा 52 लगाई है। राजभवन द्वारा डॉ राजकुमार आचार्य को नया कुलगुरु बनाया गया है। इतना सब होने के बावजूद डॉ अरुण शर्मा का आरोप है कि पिछले 2 साल से कुल सचिव अरुण चौहान द्वारा कागजों में संचालित कॉलेज को सम्बद्धता देने के साथ परीक्षा केंद्र भी बनाया गया। इसलिए जीवाजी विश्वविद्यालय में जो कुछ काला कारनामा हुआ वह सब अदृश्य रहा है।
भूतिया प्रिंसिपल उन्हें बनाया गया
ऐसे में शिव शक्ति कॉलेज को भूतिया कॉलेज ही कहा जाएगा जिसका भूतिया प्रिंसिपल उन्हें बनाया गया और भूतिया छात्र ही वहां 15 सालों में पढ़ते रहे और भूतिया लोगों ने ही उन छात्रों के नाम पर करोड़ों की स्कॉलरशिप निकाल कर फर्जीवाड़ा किया। अरुण शर्मा का कहना है कि कुलपति पर कार्रवाई हो चुकी है लेकिन कुल सचिव अरुण चौहान पर भी कार्रवाई होना चाहिए। जिसके लिए अब वह 10 मार्च को भोपाल में विधानसभा के बाहर एक दिन का सत्याग्रह करेंगे। भोपाल में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के साथ प्रदेश के सभी विधायकों को भी जीवाजी विश्वविद्यालय के फर्जीवाड़े की जानकारी देने के दस्तावेज सौंपेंगे, ताकि विधानसभा में वह इस मुद्दे को उठाकर भूतिया कारनामे पर कड़ी कार्रवाई करवा सके।
राज्यपाल ने मामले को गंभीरता से लिया
बता दें कि जीवाजी विश्वविद्यालय में झुंडपुरा शिवशक्ति कॉलेज के अलावा भी कई ऐसे कॉलेज को संबद्धता दी गई है जो विश्वविद्यालय के नियमों को ताक पर रखकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते आ रहे हैं। हालांकि डॉ अरुण शर्मा द्वारा की गई शिकायत और ईओडब्ल्यू द्वारा एफआईआर दर्ज करने के बाद राज्यपाल के द्वारा भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की गई है। ऐसे में देखना होगा कि जीवाजी विश्वविद्यालय से शुरू हुए प्रदर्शन का दौर विधानसभा तक पहुंचाने के बाद और क्या कार्रवाई देखने मिलती है।
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