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देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रधानाचार्यो को लेकर धामी सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि उत्तराखंड के माध्यमिक विद्यालयों में 10 सालों से पढ़ा रहे 4600 अतिथि अघ्यापकों का भविष्य अंधेरे में है। राज्य के इंटर कालेजों में प्रधानाचार्यों के 1108 पद खाली है। साथ ही उन्होंने अतिथि शिक्षकों को स्थाई नियुक्ति देने के लिए ठोस नीति बनाने की सलाह दी है। यशपाल आर्य ने कहा कि राज्य के राजकीय इंटर कालेजों में प्रधानाचार्यो के 1385 पद स्वीकृत हैं। कार्यरत केवल 277 हैं। यानि राज्य के इंटर कालेजों में प्रधानाचार्यों के 1108 पद खाली है। यही हाल हाई स्कूल के प्रधानाध्यपकों के हैं। राज्य के हाई स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के 910 स्वीकृत पदों में से केवल 109 भरे हैं। यानि 801 पद खाली हैं।
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1909 माध्यमिक विद्यालयों के मुखिया नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य के 2295 माध्यमिक विद्यालयों में से 1909 में उनके मुखिया नहीं हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पहाड़ के स्कूलों में तो नगण्य के बराबर प्रधानाध्यापक या प्रधानाचार्य हैं। सरकार ने 2042 में प्रधानाचार्यों के 50 प्रतिशत पद कार्यरत लैक्चरर में से सीधी भर्ती से भरने की कोशिश की लेकिन सारे संवर्गों को विश्वास में नहीं लिया। नतीजा सरकार को खुद परीक्षा स्थगित करनेी पड़ी।10 सितंबर 2024 से सरकार नियमावली में परिवर्तन करने को कह रही है। प्रश्न ये है कि 5 महिनों में नियमावली में परिवर्तन क्यों नहीं हो पाया है। ये काम आप इस सत्र में भी कर सकते थे। लैक्चरर से प्रधानाध्यपकों के पद का मामला भी न्यायालय में है। सरकार को सभी पक्षों के साथ बैठना चाहिए। बिना प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों के विद्यालयों के साथ न्याय नहीं हो पा रहा है। एक लैक्चरर अपने विषय को पड़ाने के साथ-साथ कैसे प्रशासनिक कार्य कर सकता है ?
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1329 लैक्चरर के पद खाली
यशपाल आर्य ने बताया कि माध्यमिक विद्यालयों में लैक्चररों के 12516 पदों में से 4745 खाली हैं। 3416 अतिथि अध्यापक विद्यालयों की इज्जत बचा रहे हैं। तभी भी 1329 लैक्चरर के पद खाली हैं। यही हाल सहायक अध्यापकों के हैं। सहायक अध्यापकों के 17460 स्वीकृत पदों में से3055 रिक्त हैं 1175 अतिथि शिक्षक पड़ा रहे हैं। तभी भी 1880 पदों पर कोई नहीं पड़ा रहा है। राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में 10 सालों से पड़ा रहे 4600 अतिथि अघ्यापकों का भविष्य अंधकारमय है। इन्होंने अध्यापक विहीन स्कूल को बचाए रखा है।
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अतिथि शिक्षकों को लेकर उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में ये 25000 रुपये में स्थाई अध्यापकों जैसा ही पड़ा रहे है। अतिथि शिक्षकों के उत्साह बर्धन के लिए उनकी की वेतन वृद्धि करनी चाहिए। इनमें से अधिकांश नौकरी मिलने की अधिकतम उम्र 42 पार कर चुके हैं कुछ तो दो-चार साल बाद 60 साल की रिटायर मैंट की उम्र तक पंहुच जायेंगे। सरकार की स्पष्ट नीति के बिना इनका भविष्य अंधकारमय है। सरकार को वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को स्थाई नियुक्ति देने के लिए ठोस नीति बनानी जरूरी है।
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