Rajasthan News: सुप्रीम कोर्ट ने रणथंभौर टाइगर रिजर्व और सरिस्का नेशनल पार्क की पारिस्थितिकी और बाघों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ निर्देश दिए हैं कि इन अभयारण्यों में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों त्रिनेत्र गणेश मंदिर (रणथंभौर) और पांडुपोल हनुमान मंदिर (सरिस्का) में अब भंडारा और प्रसाद पकाने की अनुमति नहीं होगी।

हालांकि श्रद्धालु बाहर से तैयार भोग/प्रसाद लाकर मंदिरों में चढ़ा सकेंगे। मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित दुकानों में भी किसी प्रकार का भोजन नहीं पकाया जा सकेगा, केवल बाहर से लाया गया भोग बेचा जा सकेगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए याचिका
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि रणथंभौर और सरिस्का जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व में धार्मिक आयोजनों और वाहनों की बढ़ती आवाजाही से वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में है। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य और केंद्र सरकारों से 6 हफ्तों में जवाब मांगा है।
अवैध खनन, ट्रैफिक और अतिक्रमण पर भी रोक
मुख्य न्यायाधीश ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति ए.एस. चांदुरकर की पीठ ने आदेश में कहा कि रणथंभौर और सरिस्का के कोर एरिया में खनन तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। इसके अलावा पार्क में बढ़ती वाहन आवाजाही और अतिक्रमण को रोकने के लिए तीन सदस्यीय समितियों का गठन किया गया है।
पांडुपोल मंदिर तक निजी वाहन नहीं, इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी
पांडुपोल हनुमान मंदिर के लिए अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब निजी वाहन मंदिर तक नहीं जाएंगे। राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि 31 मार्च 2025 तक तीर्थयात्रियों के लिए इलेक्ट्रिक शटल बसों की व्यवस्था की जाए।
इसके साथ ही कोर्ट ने सुझाव दिया है कि भविष्य में ट्रामवे, एलिवेटेड रोड, मोटरेबल ट्विन टनल, रोपवे या स्काईवॉक जैसे पर्यावरण-सम्मत विकल्पों पर भी एक वर्ष के भीतर विचार किया जाए, जिसके लिए NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) की सलाह ली जाए।
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