चंडीगढ़. पंजाब में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने आज राज्य के 23 जिलों में ट्रैक्टर मार्च निकाला, जिसमें वे सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी का विरोध कर रहे हैं। यह मार्च उन सभी गांवों में निकाला जा रहा है, जिनकी जमीन इस नीति के तहत अधिग्रहित की जानी है।
किसानों का कहना है कि जब तक सरकार इस नीति को वापस नहीं लेती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग स्कीम के तहत लगभग 65,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जानी है। इस नीति के तहत किसानों को उनकी जमीन के बदले नकद राशि के बजाय आवासीय और वाणिज्यिक प्लॉट दिए जाएंगे।
सरकार ने इस संबंध में नई नीति बनाई है और दावा कर रही है कि यह किसानों के लिए फायदेमंद होगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस पॉलिसी के लाभों को बार-बार जनता के सामने रखा है। उनका कहना है कि गहन विचार-विमर्श के बाद यह नीति लागू की गई है और यह किसानों के हित में है।

किन क्षेत्रों में होगी जमीन का अधिग्रहण?
सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत मोहाली, रूपनगर, राजपुरा, फतेहगढ़ साहिब, समराला, जगरांव, पटियाला, संगरूर, बरनाला, बठिंडा, मानसा, मोगा, फिरोजपुर, नवांशहर, जालंधर, होशियारपुर, सुल्तानपुर लोधी, कपूरथला, गुरदासपुर, अमृतसर, बटाला, तरनतारन और पठानकोट जैसे क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इन क्षेत्रों में शहरी संपत्तियों और अर्बन एस्टेट्स का विकास किया जाएगा।
किसानों का विरोध, सरकार का जवाब
किसानों का कहना है कि यह नीति उनकी आजीविका के लिए खतरा है और वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे। दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि यह स्कीम किसानों को लंबे समय में आर्थिक लाभ देगी और शहरी विकास को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा किसानों के साथ रही है और कोई भी फैसला उनके हितों के खिलाफ नहीं लिया जाएगा।
लैंड पूलिंग पॉलिसी को पहली बार 2011 में अकाली सरकार ने पेश किया था। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार और फिर भगवंत मान सरकार ने इसमें संशोधन कर इसे आगे बढ़ाया। जून 2025 में पंजाब कैबिनेट ने नई लैंड पूलिंग नीति को मंजूरी दी, जिसके तहत औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय क्षेत्रों का विकास किया जाएगा।
किसानों के इस ट्रैक्टर मार्च ने पंजाब में लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। जहां सरकार इसे विकास की दिशा में एक कदम बता रही है, वहीं किसान इसे अपनी जमीन और आजीविका पर खतरे के रूप में देख रहे हैं।
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