पटना। बिहार के निगरानी विभाग ने शुक्रवार को ग्रामीण कार्य विभाग के असिस्टेंट इंजीनियर नागेंद्र कुमार के ठिकानों पर एक बड़ी रेड की। यह छापेमारी 17 घंटे तक चली और इस दौरान इंजीनियर के पटना स्थित फ्लैट से 17 लाख 60 हजार रुपये कैश और करीब 25 लाख रुपये की ज्वैलरी बरामद की गई। इसके अलावा, मोकामा, पटना और गयाजी में स्थित उनके आवास और कार्यालयों पर भी सघन छापे मारे गए।

छापेमारी की योजना बनाई गई

नागेंद्र कुमार गयाजी के चंदौली थाना क्षेत्र के कुजाप गांव के निवासी हैं, लेकिन इन दिनों वह बाढ़ अनुमंडल के मोकामा थाना क्षेत्र में ग्रामीण कार्य अवर प्रमंडल में तैनात हैं। निगरानी विभाग की टीम को उनके खिलाफ पिछले कुछ महीनों से शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद छापेमारी की योजना बनाई गई।

भारी वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले

इस रेड के दौरान मिली जानकारी के अनुसार, नागेंद्र कुमार ने भूपतिपुर में 2 प्लॉट खरीदे थे, जिनमें से एक प्लॉट पर वे एक 4 मंजिला घर बना रहे थे। इसके अलावा, उनके पास गयाजी में भी 2 प्रॉपर्टी हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। इस तरह की संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के अलावा, विभाग को उनके बैंक खातों में भी भारी वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले हैं।

अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था

28 अगस्त को नागेंद्र कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। जांच में यह पाया गया कि उनके पास 73 लाख 32 हजार रुपये की अतिरिक्त संपत्ति है, जो उनकी घोषित आय से 125 प्रतिशत अधिक है। यह उनके वित्तीय जीवन के बारे में गंभीर सवाल खड़े करता है और विभाग को यह उम्मीद है कि इससे जुड़े अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।

आगे की कार्रवाई की जा सकती है

वर्तमान में इस मामले में निगरानी विभाग की जांच जारी है, और नागेंद्र कुमार के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इस छापेमारी से विभाग के अधिकारियों को यह संकेत मिला है कि ग्रामीण कार्य विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं, और इस तरह की छापेमारी आगे भी जारी रह सकती है।

निगरानी विभाग का संकल्प, भ्रष्टाचार के खिलाफ होगी कार्रवाई

निगरानी विभाग के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि इस तरह की कार्रवाई केवल शुरुआत है। उनकी योजना है कि बिहार राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और तेज किया जाए, ताकि आम लोगों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों को कड़ा संदेश दिया जा सके। यह छापेमारी नागेंद्र कुमार जैसे अधिकारियों की संपत्ति के अलावा एक संकेत है कि बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या और अधिकारियों पर भी इसी तरह की जांच की जाएगी।