अनुगुल। ओडिशा का वेटलैंड ठण्ड आते ही प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना बन गया है। हर साल ठंड शुरू होते ही दूर-दराज के ठंडे देशों से हजारों की संख्या में जलपक्षी यहां पहुंचते हैं और कई महीनों तक यहीं डेरा जमाए रहते हैं। यह स्थान केंद्रापाड़ा जिले के राजनगर वन प्रभाग अंतर्गत गहिरमाथा वन क्षेत्र अंतर्गत आता है.

मुख्य सचिव अटल डुल्लू भी रविवार को घराना वेटलैंड में पहुंचकर विकास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने यहां कुछ समय बिताकर प्रवासी पक्षियों को देखो। स्थानीय किसान प्रवासी पक्षियों की ओर खेतों में गेहूं की फसल नष्ट करने की शिकायत कर रहे हैं। इसके लिए वन्यजीव संरक्षण विभाग के कर्मचारी दिन-रात नजर रख रहे हैं।

वन अधिकारियों के अनुसार, इस क्षत्र में बार-हेडेड गीज, रुड्डी शेल्डक, नॉर्दर्न पिंटेल, शॉवेलर, गैडवाल, स्टिल्ट, सैंडपाइपर सहित कई प्रजातियों के जलपक्षी देखे जा रहे हैं। ये पक्षी दिन में तालाबों में भोजन करते हैं और शाम के समय झुंड बनाकर उड़ते हुए पास के मैंग्रोव और कैसुएरिना वनों में चले जाते हैं, जहां वे रात बिताते हैं।

सुबह होते ही फिर तालाबों की ओर लौट आते हैं। गहिरमाथा के अलावा हुकीतोला, लुंचघोला, बातीघर, मलाडी, हेटा मुंडिया, कंदरा और तांडा कैसुएरिना वन क्षेत्र भी इन दिनों प्रवासी और स्थानीय पक्षियों से भरे हुए हैं। पक्षियों की चहचहाहट और उड़ानें पूरे इलाके को जीवंत बना देती हैं। स्थानीय लोग भी सुबह-शाम इस दृश्य को देखने पहुंचते हैं।

तालाब में अठखेलियां कर ये प्रवासी परिंदे पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। करीब तीन से चार हजार सरपट्टी सवन दिन भर तालाब में उतर रहे हैं। हालांकि सुबह-शाम इन पक्षियों का सीमा के उस पार पाकिस्तान में भी आना-जाना लगा रहता है। अधिकतर समय ये घराना में ही गुजार रहे हैं। इन विदेशी मेहमानों को निहारने के लिए पर्यटक के साथ स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थी भी पहुंच रहे हैं। अधिकतर लोग अपने वाहन लेकर ही पहुंच पाते हैं।

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