कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका (KDMC) चुनाव में शिवसेना-BJP गठबंधन ने एक ऐतिहासिक रणनीति अपनाते हुए एक बड़ा राजनीतिक रिकॉर्ड बना लिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की संयुक्त रणनीति के चलते मतदान से पहले ही गठबंधन के 20 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर शहर में जमकर चर्चाएं तेज हैं और विपक्ष इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ कहने के बजाय ‘पैसों का समझौता’ करार दे रहा है।कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव में नामांकन वापसी के आखिरी दिन विपक्षी दलों के बड़े पैमाने पर नामांकन वापस लेने से सत्ताधारी महायुति को बड़ा राजनीतिक फायदा मिला है. बीजेपी के 14 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 6 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित होकर चुनाव से पहले ही महायुति के 20 पार्षद तय हो गए हैं.
अब इन वार्डों में नागरिकों को मतदान का अधिकार ही नहीं मिल पाएगा। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव लड़ने में भारी खर्च आने की आशंका के चलते कई उम्मीदवारों ने नामांकन वापस ले लिया, जिससे यह पूरा घटनाक्रम पैसे के लेन-देन से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। चुनाव से पहले ही महायुति के कुल 20 पार्षद निर्विरोध चुन लिए गए हैं. इसके बाद महायुति की ओर से दावा किया जा रहा है कि KDMC में अगला महापौर भी महायुति का ही होगा.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ ठाकरे गुट और मनसे ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवारों की ओर से भी नामांकन वापस लेने से महायुति को अप्रत्यक्ष समर्थन मिला. निर्विरोध चुनावों की संख्या बढ़ने से स्थानीय नागरिकों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है. लोगों का कहना है कि अगर चुनाव ही नहीं कराना था, तो सभी को निर्विरोध ही चुन लेते.
चुनाव से पहले राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के एक साथ आने से ‘ठाकरे ब्रांड’ का जोरदार प्रचार हुआ था. लेकिन KDMC चुनाव में ठाकरे गुट और मनसे के उम्मीदवारों की ओर से बड़ी संख्या में नामांकन वापस लेने से यह ब्रांड कल्याण-डोंबिवली में कमजोर पड़ता दिख रहा है. मनसे के पूर्व विधायक राजू पाटिल का पूरा ध्यान केडीएमसी चुनाव पर होने की बात कही जा रही थी, लेकिन पार्टी के पांच उम्मीदवारों की हार के बाद स्थानीय नेतृत्व पर सवाल खड़े हो गए हैं. इसी तरह, शिवसेना (ठाकरे गुट) के उपजिला प्रमुख राहुल भगत के नामांकन वापस लेने से बीजेपी के मुकुंद पेडणेकर निर्विरोध चुने गए. खास बात यह रही कि नामांकन वापसी के कुछ ही घंटों बाद राहुल भगत ने बीजेपी जॉइन कर ली.
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