दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने यमुना नदी को प्रदूषित करने वाले बारापुला नाले की सफाई में उल्लेखनीय प्रगति की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सौंपी गई हालिया रिपोर्ट में DJB ने बताया है कि नाले से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नाले में गिरने वाले गंदे पानी और कचरे को नियंत्रित करने के लिए सफाई, निगरानी और तकनीकी उपाय लागू किए जा रहे हैं, ताकि यमुना में प्रदूषण का स्तर कम किया जा सके।

43 छोटी नालियों में से 10 पर काबू

रिपोर्ट के अनुसार, बारापुला नाले में सीवेज डालने वाली 43 छोटी नालियों की पहचान पिछले साल की गई थी। इनमें से 10 नालियों को सफलतापूर्वक ट्रैप कर लिया गया है। अब इन नालियों का गंदा पानी सीधे नाले में गिरने के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में भेजा जा रहा है, जहां उसका शोधन किया जा रहा है।

25 नालियों पर काम जारी

बाकी 25 नालियों को ट्रैप करने का काम प्रगति पर है, जिसे 30 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कुछ इलाकों में निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि अन्य स्थानों पर प्रशासनिक मंजूरियां ली जा रही हैं। जल बोर्ड ने बताया कि जहां झुग्गी क्लस्टर, जंगल की जमीन या विभागीय अड़चनें आ रही हैं, वहां संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर समस्या का समाधान किया जा रहा है। DJB का कहना है कि इन उपायों से यमुना में गिरने वाले अनट्रीटेड सीवेज की मात्रा में बड़ी कमी आएगी और नदी की सफाई को गति मिलेगी।

34 नए छोटे STP का निर्माण

यमुना में प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड 34 नए डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP) भी बना रहा है। ये प्लांट स्थानीय स्तर पर सीवेज का उपचार करेंगे। इनमें से 13 प्लांट 2025 के अंत तक चालू हो जाएंगे, शेष प्लांट 2028 तक तैयार किए जाएंगे, 33 प्लांटों के टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं. ताजपुर पहाड़ी, फतेहपुरी बेरी और घिटोरनी में बनाए जा रहे तीन DSTP खासतौर पर अनधिकृत कॉलोनियों से निकलने वाले सीवेज को साफ करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

NGT की निगरानी में चुनौतियां

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) दिल्ली से जुड़ी कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है, जिनमें निजामुद्दीन वेस्ट के निवासियों ने मानसून के दौरान जलभराव और नालियों में सीवेज बहने की समस्या उठाई है। ट्रैब्यूनल ने स्पष्ट कहा है कि नालियों में सीवेज बहना पूरी तरह बंद होना चाहिए। NGT के अनुसार, नालियों की ट्रैपिंग केवल एक अस्थायी उपाय है, क्योंकि इससे बारिश के पानी की प्राकृतिक निकासी प्रभावित हो सकती है। इसको ध्यान में रखते हुए दिल्ली जल बोर्ड अब ‘स्रोत पर ट्रैपिंग’ (Source-level Trapping) के सिद्धांत पर काम कर रहा है, ताकि सीवेज को शुरुआत में ही अलग किया जा सके। जल बोर्ड ने बताया कि दिल्ली के 15 बड़े नालों को पहले ही इस तरीके से ट्रैप किया जा चुका है।

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