टुकेश्वर लोधी, आरंग | प्रदेश के प्रमुख और विश्वसनीय न्यूज पोर्टल लल्लूराम डॉट कॉम की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है. आरंग के ग्राम भिलाई स्थित मोदी बायोटेक प्लांट द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण को लेकर प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया और छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण विभाग की एक विशेष जांच टीम मौके पर पहुंची. इस कार्रवाई से क्षेत्रीय ग्रामीणों और किसानों को न्याय की उम्मीद जगी है.

शनिवार को कनिष्ठ वैज्ञानिक प्रवीण भारती के नेतृत्व में पहुंची पर्यावरण विभाग की टीम ने प्लांट परिसर, प्रभावित नाले और आसपास के खेतों का सघन निरीक्षण किया. जांच के दौरान प्लांट की जल निकासी व्यवस्था, फैक्ट्री से बाहर बह रहे नाले और खेतों में जमा पानी के नमूने एकत्र किए गए. इन नमूनों को राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भेजा जाएगा, जहां पानी में मौजूद हानिकारक रसायनों की मात्रा और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की जांच की जाएगी.

जांच के समय आरंग के नायब तहसीलदार गजानंद सिदार भी मौके पर मौजूद रहे. टीम ने प्लांट के पिछले हिस्से और मुख्य निकासी द्वारों की भी बारीकी से जांच की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रदूषित पानी किस तरह बाहर छोड़ा जा रहा है.

इधर, मोदी बायोटेक प्लांट के खिलाफ क्षेत्रीय ग्रामीणों और किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. किसानों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला जहरीला रसायनयुक्त पानी सीधे नाले के माध्यम से उनके उपजाऊ खेतों में पहुंच रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है और फसलें बर्बाद हो रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से विरोध के बावजूद प्लांट प्रबंधन ने अपनी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं किया है.

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी कई बार जांच टीमें मौके पर पहुंचीं और नमूने लेकर गईं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई. प्रशासन की इसी ढुलमुल कार्यशैली के चलते प्लांट प्रबंधन के हौसले बुलंद होते गए.

अब एक बार फिर जांच टीम के पहुंचने से क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि इस बार कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगी. जनप्रतिनिधियों और किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच के नाम पर लीपापोती की गई या केवल नोटिस देकर मामला निपटाने की कोशिश हुई, तो वे बड़े और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे.