Rajasthan News: बीकानेर शहर में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव में दूसरे दिन शनिवार को सांसोलाव तालाब किनारे योग का कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में ऊंट नृत्य, ऊंट फर कटिंग, ऊंट साज. सज्जा, ऊंट दौड़ और घुड़दौड़ का आयोजन किया गया।

समारोह में करीब 15 ऊंट सज धजकर पहुंचे। जहां सजे घजे ऊंटों ने ढोल और नगाड़ों को थाप पर डांस किया। घड़सीसर से आए एक कंट पर महाराज गंगा सिंह, जूनागढ़ किला और मां करणी समेत अलग. अलग कलाकृति बनी दिखाई दी। समारोह के दौरान एक ऊंट ने अपने मालिक का सिर मुंह में डालकर लोगों को हैरत में डाल दिया। इसने पानी से भरी बाल्टी मुंह में रख डांस कर लोगों का मन मोह लिया। इससे पूर्व ऊंट मैदान में घुंघरू की आवाज और बैंड-बाजों की धुन के साथ वह डांस करता गया।

कार्यक्रम के दौरान एक के ऊपर एक बिछाए गए पलंग पर ऊंट को लेटाया गया। इसके बाद ऊंट मालिक ने ऊंट की पीठ पर अलग. अलग तरह के स्टंट दिखाए। ढोल बाजे के साथ ऊंट लगातार मैदान में घूमता डांस करने लगा। पलंग के चारों तरफ चाय की केटली, पानी की बाल्टी और माला को रखा गया। ऊंट बारी बारी से एक. एक सामान को उठा कर अपने मालिक को देता रहा। आखिर में माला अपने मुंह में उठाकर मैदान में मौजूद एक पर्यटक को पहना दी।

वहीं डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में शनिवार सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ऊंटां रो इतिहास विरासत के साथ अंतर्गत राजस्थान राज्य अभिलेखागार की ओर से कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। शाम 7 से डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में बेस्ट ऑफ राजस्थान फोक बाइट कार्यक्रम के तहत लोकल और राजस्थानी कलाकारों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जोड़बीड़ क्षेत्र में बर्ड फेस्टिवल का आयोजन अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव के दौरान वन विभाग के सहयोग से बर्ड फेस्टिवल का आयोजन जोड़बीड़ स्थित लव कुश वाटिका और गिद्ध संरक्षण क्षेत्र में किया गया। वन विभाग के डीएफओ संदीप हंगाणी के अनुसार जोड़बीड़ में इस समय 5 प्रकार के गिद्ध की प्रजाति के अलावा 10 से अधिक प्रजातियों के शिकारी पक्षी चील, बाज, शिखरा, फॉल्कन प्रजाति आई हुई है। दिसंबर और जनवरी माह में हजारों की संख्या में विदेशी पक्षियों ने जोड़बीड़ में डेरा डाला हुआ है। इसके अलावा मरू लोमड़ी, चिंकारा, सरीसृप प्रजाति के जीव जंतुओं से भी पर्यटकों दीदार हुए।

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