ISRO Launch Anvesha Satellite: नए साल में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी इसरो ने ऊंची छलांग लगाते हुए देश का सबसे अहम डिफेंस सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इसरो ने PSLV-C62 से अन्वेषा (EOS-N1) सैटेलाइट को सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया। इस मिशन के तहत पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV)-C62 अन्वेषा सैटेलाइट के अलावा 14 को-पैसेजर सैटेलाइट लेकर रवाना हुआ।

सभी 15 सैटेलाइट को सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit – SSO) में तैनात करने की योजना है। इनमें अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-N1) अन्वेषा मुख्य है, जिसे धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर SSO में स्थापित किया जाएगा।

इस मिशन को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) अंजाम देने वाला है। NSIL, ISRO की कॉमर्शियल इकाई है। यह PSLV रॉकेट की कुल 64वीं उड़ान भी है। यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट बनाने और उसके लॉन्च के लिए किया जा रहा 9वां कॉमर्शियल मिशन है।

जिन 15 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया जाएगा, उनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट भी शामिल हैं। हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस इस लॉन्च के जरिए अपने 7 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेज रही है। 8 विदेशी सैटेलाइट्स में फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के सैटेलाइट शामिल हैं। यह मिशन भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है। क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने PSLV मिशन में इतनी बड़ी हिस्सेदारी की है। PSLV दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में गिना जाता है। इसी रॉकेट से चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं।

600 किलोमीटर ऊंचाई से झाड़ी में छिपे दुश्मन की फोटो ले सकता है

अन्वेषा को आने वाले समय में धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस पोलर आर्बिट (SSO) में स्थापित किया जाएगा। ऐसा करने से यह आतंकियों से लेकर घुसपैठियों और उपद्रवी सब पर आसानी से नजर रख सकेगी। अन्वेषा को भारत का सीसीटीवी कहा जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी मदद से अब दुश्मन पर नजर रखी जाएगी। अन्वेषा सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस एक स्पाई (खुफिया) सैटेलाइट है, जिसका मकसद सटीक निगरानी और मैपिंग करना है।

सेना का सीक्रेट वेपन है अन्वेषा

EOS-N1 एक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे DRDO ने विकसित किया है। अन्वेषा सैटेलाइट, ‘हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग’ यानी HRS तकनीक पर काम करता है, जो रोशनी के ज्यादा स्पेक्ट्रम को डिटेक्ट करता है। यह भारत को अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने में मदद करेगा। असल में ये सेनाओं के लिए एक सीक्रेट वेपन की तरह काम करता है। अन्वेषा एक निश्चित समय पर धरती के प्वाइंट से गुजरेगा।

EOS-N1 के अलावा,पीएसएलवी-C62 मिशन में 15 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजी गई हैं। इनमें एक मुख्य भारतीय सैटेलाइट और 14 अन्य छोटे उपग्रह शामिल हैं। इन 14 में से 8 विदेशी सैटेलाइट हैं, जो फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और ब्रिटेन के हैं।

मुख्य उपग्रह और पेलोड का विवरण

  • EOS-N1 (अन्वेषा): रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के लिए विकसित लगभग 400 किलोग्राम वजन की हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है। यह 12 मीटर रेजोल्यूशन के साथ रक्षा निगरानी, कृषि आकलन, शहरी मानचित्रण और पर्यावरणीय ट्रैकिंग में अहम भूमिका निभाएगा।
  • KID (Kestrel Initial Technology Demonstrator): स्पेनिश स्टार्टअप का 25 किलोग्राम का री-एंट्री टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर, जिसकी अंतिम तैनाती के बाद दक्षिण प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ री-एंट्री का परीक्षण किया जाएगा।
  • अन्य उपग्रह: भारत के साथ मॉरीशस, लक्जमबर्ग, UAE, सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका के कई वाणिज्यिक और शोध उपग्रह इस मिशन का हिस्सा हैं।

इसरो का वर्क हॉर्स माना जाता है PSLV

उल्लेखनीय है कि PSLV को इसरो का वर्क हॉर्स माना जाता है। अब तक की 63 उड़ानों में इस रॉकेट ने चंद्रयान-1, मंगल ऑर्बिटर मिशन और आदित्य-एल1 जैसे ऐतिहासिक अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। साल 2017 में एक ही मिशन में 104 उपग्रहों के प्रक्षेपण का विश्व रिकॉर्ड भी PSLV के नाम है। हालांकि, पिछले साल मई में PSLV-C61 मिशन विफल रहा था।

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